Tomato farming : बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम मिरचिद में टमाटर की खेती किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बनकर उभरी है. महानदी तट पर बसे इस गांव में करीब 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है, जिससे गांव की पहचान एक सब्जी हब के रूप में बनने लगी है. किसान लेखराम केवट आधुनिक तकनीकों के जरिए हर साल लाखों की कमाई कर रहे हैं.

मिरचिद गांव के खेतों में टमाटर की फसल पूरी तरह तैयार नजर आती है. चारों ओर फैली हरियाली इस बात का संकेत देती है कि किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. यह बदलाव गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है.

लेखराम केवट अपने खेतों में ‘लक्ष्मी वैरायटी’ के टमाटर उगाते हैं, जिसकी बाजार में काफी मांग रहती है. इस किस्म के टमाटर आकार, रंग और गुणवत्ता में बेहतर होते हैं, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं और उनकी आय में वृद्धि होती है.

खेत से रोजाना लगभग 100 कैरेट टमाटर की आपूर्ति की जा रही है. यह उत्पादन स्थानीय बाजारों के साथ रायगढ़ और शिवरीनारायण की मंडियों तक पहुंच रहा है. नियमित सप्लाई के चलते किसानों की आमदनी स्थिर बनी हुई है.

खेती के काम में पूरा परिवार जुटा हुआ है, जिससे मजदूरी का खर्च कम हो जाता है. परिवार आधारित खेती मॉडल न केवल लागत घटाता है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा करता है

लेखराम केवट की सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. अब अन्य किसान भी टमाटर की उन्नत खेती को अपनाने लगे हैं, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखा जा रहा है.



