केंद्र सरकार की नीतियों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता (आर्थिक मामले) गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि आज भारत के विकास एजेंडा को आकार देने में युवा नेतृत्व की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में बोलते हुए अग्रवाल ने प्रधानमंत्री के ‘यंग लीडरशिप डायलॉग’ को इस दिशा में एक अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए करीब 50 लाख युवा प्रतिभागियों ने देश निर्माण में योगदान देने की अपनी इच्छा जताई।
अग्रवाल के मुताबिक, यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। सबसे पहले प्रतिभागियों से विस्तृत आवेदन मांगे गए, इसके बाद राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर निबंध आधारित मूल्यांकन हुआ। इस बड़ी संख्या में से चुनिंदा युवाओं को शॉर्टलिस्ट किया गया और अंततः 11 प्रतिभागियों को अपने विचार सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखने का मौका मिला।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘ये संवाद केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि इन्हें नीतियों में उतारा जा रहा है।’ अग्रवाल ने दावा किया कि युवाओं के साथ हुए इन संवादों से निकले कई सुझावों की झलक केंद्रीय बजट में भी देखने को मिली। उनका कहना था कि सरकार अब जमीनी आकांक्षाओं और भविष्य की सोच को ध्यान में रखते हुए नीतियां बना रही है।
इस पहल का अंतिम चरण भारत मंडपम में आयोजित हुआ, जहां करीब 3,000 प्रतिभागियों ने दो दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसे युवा नेतृत्व की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करने की दिशा में एक संगठित प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अग्रवाल के ये बयान SRCC के प्रमुख शैक्षणिक मंच ‘श्री राम इकोनॉमिक्स समिट 2026’ के एक सत्र के दौरान आए। इस आयोजन का उद्देश्य समकालीन आर्थिक चुनौतियों और नीति नवाचार पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।
युवाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण में भागीदार बताते हुए अग्रवाल ने इसे शासन प्रणाली में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में पेश किया। अब संदेश साफ है कि भारत की नीतियों का भविष्य अब केवल सत्ता के गलियारों में नहीं, बल्कि देश के युवा नेतृत्व के साथ संवाद के जरिए भी तय हो रहा है।



