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“पश्चिम एशिया संकट : जयशंकर ने सऊदी अरब और UAE के विदेश मंत्रियों से बात की”

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ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रियों से पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

जयशंकर ने शनिवार रात यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। जयशंकर ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से संबंधित घटनाक्रम पर सऊदी अरब के विदेश मंत्री के साथ चर्चा की।

जायद अल नाहयान के साथ हुई बातचीत के बारे में जयशंकर ने कहा, ”क्षेत्रीय स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया।” माना जाता है कि जयशंकर की दोनों विदेश मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है।

विदेश मंत्री जयशंकर की दो दिवसीय ब्रसेल्स यात्रा शुरू

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के लिए रविवार को ब्रसेल्स का दो दिवसीय दौरा शुरू किया। जनवरी में दोनों पक्षों के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने के बाद भारत की ओर से ब्रसेल्स का यह पहला उच्चस्तरीय दौरा है। ब्रसेल्स में ईयू का मुख्यालय है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास के निमंत्रण पर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स जा रहे हैं, जहां वह 27 देशों वाले ईयू के विदेश मंत्रियों से एक बैठक के दौरान बातचीत करेंगे।

मंत्रालय ने कहा, “यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री यूरोपीय यूनियन के नेताओं और बेल्जियम तथा अन्य ईयू सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठकें भी करेंगे।” मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, “ऐतिहासिक 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रही विदेश मंत्री की इस यात्रा से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है।” भारत और यूरोपीय यूनियन ने 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ईयू के शीर्ष नेताओं के शिखर सम्मेलन के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।