ईरान और इजराइल के बीच युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने का फैसला किया है।
भारतीय नौसेना की सुरक्षा में ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे बड़े जहाज अब सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहे हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Strait of Hormuz Indian LPG tanker: होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता
ईरान ने इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत के साथ अपनी दोस्ती निभाई है। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्गों में से एक है, वहां से भारतीय एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी गई है। ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहली ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के हित एक समान हैं, इसलिए युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद भारतीय जहाजों को प्राथमिकता दी गई।
Israel Iran War Tension Impact: जहाज ‘शिवालिक’ की घर वापसी
भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह जहाज वर्तमान में खुले समुद्र में है और भारतीय नौसेना की कड़ी सुरक्षा में आगे बढ़ रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो दिनों के भीतर ‘शिवालिक’ भारत के किसी प्रमुख बंदरगाह, जैसे मुंबई या कांडला पर पहुंचेगा।
‘नंदा देवी’ और 46,000 टन गैस
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘नंदा देवी’ जहाज एक बड़ी खेप लेकर आ रहा है। इस जहाज में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लदी हुई है। इतनी भारी मात्रा में गैस की सुरक्षित आपूर्ति भारत की डोमेस्टिक सप्लाई चेन के लिए जीवनरेखा की तरह है। ‘नंदा देवी’ ने भी संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को पार कर लिया है।
मोदी-पेजेशकियन बातचीत का असर
इस सुरक्षित ट्रांजिट के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई ‘हाई-लेवल’ बातचीत का बड़ा हाथ है। इजराइल और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बावजूद, दोनों नेताओं ने ऊर्जा प्रवाह और माल की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चर्चा की थी। इसी संवाद का नतीजा है कि भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला।
भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच
भारतीय नौसेना इस पूरे ऑपरेशन में एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है। मिशन के तहत तैनात नौसैनिक जहाजों ने ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ को करीब से ट्रैक किया है। जब तक ये जहाज भारतीय सीमा में सुरक्षित प्रवेश नहीं कर जाते, तब तक नौसेना के अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि देश की ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।



