Israel Iran War: Strait of Hormuz को लेकर इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या ईरान ने व्यापार के लिए इस्तेमाल होने वाले इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछानी शुरू कर दी हैं और अगर ऐसा हुआ तो इस समुद्री रास्ते पर कंट्रोल किसका होगा?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच यह मुद्दा अचानक सुर्खियों में आ गया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के बारूद बिछाने वाले शिप इस इलाके में एक्टिव हो गए हैं। ऐसे में जानेंगे ये किया समुद्री माइन्स (Underwater Mines Deployment) क्या होता है और ईरान को ये टेक्नोलॉजी किसने दी होगी?
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी हलचल
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में माइन्स बिछाने का मामला तब और ज्यादा चर्चा में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में बारूद बिछाने के शक में कुछ जहाजों पर हमला किया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं तो अमेरिका इसका जवाब और भी ताकत से देगा। लिहाजा, अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज एक अहम रणनीतिक जगह बन गया है क्योंकि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
ईरान को किसने दी बारूदी सुरंग बिछाने की टेक्नोलॉजी?
इसके बारे में हमने नेवी मामलों के जानकार और पूर्व लेफ्टिनेंट कमांडर अविनाश कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि “सिर्फ चीन ही ईरान को ये बारूदी सुरंग बिछाने की टेक्नोलॉजी दे सकता है। हालांकि इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है लेकिन चीन के अलावा कोई और देश इतना बड़ा जोखिम नहीं लेगा। रूस पहले से जंग में है और उसका अपना हथियारों का भंडार खाली हो रहा है।वहीं चीन अंडर-सी माइन्स को बड़े पैमाने पर बनाता है। इसलिए उसके अलावा कोई और शायद ही ईरान को इसकी सप्लाई देगा।”
कैसे काम करती है समुद्र के अंदर बारूदी सुरंग?
लेफ्टिनेंट कमांडर कुमार बताते हैं कि “ये समुद्री माइन्स 2 या तीन फुटबॉल के साइज से लेकर एक बड़े ट्रॉली बैग के साइज के हो सकते हैं। इसको तैनात करने के लिए अलग तरह के जहाज लगते हैं। ये समुद्र के ऊपर इसे पानी पर छोड़ते हैं। जिसके बाद ये पानी के कुछ अंदर जाकर एक जगह पर रुके रहते हैं और वहीं तैरते हैं। इसके ब्लास्ट होने के भी दो तरीके हैं।”
- “एकॉस्टिक- इस तरीके में, जो भी शिप इन माइन्स के पास से गुजरते हैं तो ये उसके प्रोपेलर की आवाज या फिर सोनार सिग्नल सिस्टम को कैच कर एक्टिव हो जाते हैं। फिर जैसे ही शिप इनके ऊपर आता है, ये बड़ा धमाका करते हैं, जिससे शिप कुछ ही देर में डूब जाता है।”
- “प्रेशर- इस तरीके में कोई भी शिप इनके आसपास या फिर ऊपर से गुजरता है तो ये उस वक्त पानी बदलते हुए प्रेशर को कैच करते हैं और धमाका हो जाता है। एक माइन्स का धमाका एक जहाज में बड़ा छेद कर उसे डुबोने के लिए काफी होता है।”
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान इस शिपिंग कॉरिडोर में ईरानी नेवी बारूदी सुरंग बिछाने की तैयारी कर सकता है। हालांकि अभी तक इसकी पक्की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि ईरान छोटी बोट्स का इस्तेमाल कर सकता है। इन बोट में आमतौर पर दो या तीन बारूदी सुरंगें ले जाने की क्षमता होती है।
अभी तक कितनी बारूद बिछाई गई होगी
खुफिया सूत्रों के मुताबिक अब तक इस क्षेत्र में सिर्फ कुछ दर्जन खदानें ही बिछाई गई हो सकती हैं। लेकिन असली चिंता यह है कि अगर संघर्ष बढ़ता है तो ईरान के पास सैकड़ों और बारूद बिछाने की क्षमता मौजूद है। बताया जाता है कि ईरान के पास ऐसे हजारों जहाज हैं जो जरूरत पड़ने पर बहुत तेजी से बड़ी संख्या में समुद्र में बारूदी सुरंगे बिछा सकते हैं।
खतरनाक हमलों की चेतावनी
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसी मिसाइल तकनीक और सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है जो पहले ड्रग तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। उनका कहना था कि अगर कोई जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में बारूद बिछाने की कोशिश करेगा तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल तेल का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हर दिन इसी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से होकर गुजरता है। इसके अलावा लिक्विड नैचुरल गैस (LNG) शिपमेंट का लगभग एक-तिहाई भी इसी रास्ते से जाता है।
ईरान की चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर Alireza Tangsiri ने भी कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी या उसके सहयोगी देशों के जहाज इस समुद्री रास्ते से गुजरते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक मिसाइल और ड्रोन किसी भी बेड़े को रोकने में सक्षम हैं।
आखिर किसका कंट्रोल होगा?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर कंट्रोल को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। ईरान इस जलमार्ग के उत्तरी तट पर मौजूद है और उसके पास मिसाइल, ड्रोन और बारूद बिछाने की क्षमता है जिससे वह जहाजों को खतरा पहुंचा सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका की नौसेना और उसके सहयोगी देशों के पास बड़े युद्धपोत, आधुनिक तकनीक और माइन-क्लियरिंग सिस्टम हैं। इनकी मदद से वे समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ कर शिपिंग मार्ग को फिर से खोल सकते हैं।



