देश के प्रमुख औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप ने अपनी दीर्घकालिक रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और कोर मटेरियल्स पर केंद्रित विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की घोषणा की है।
समूह 2035 तक 100 अरब डॉलर के निवेश, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग और डीकार्बोनाइजेशन पर विशेष जोर देगा।
यह जानकारी Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अडाणी ने अखिल भारतीय प्रबंधन संघ के प्लेटिनम जुबली समारोह में दी। करण अडानीने समूह की पूंजी आवंटन रणनीति स्पष्ट करते हुए बताया कि भविष्य की वृद्धि तीन प्रमुख स्तंभों-ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और भारत के विकास के लिए आवश्यक मूलभूत सामग्रियों-पर आधारित होगी।
दीर्घकालिक दृष्टि में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे अहम क्षेत्र रहेगा। इसमें शहर गैस वितरण, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और डेटा सेंटर्स जैसे डिजिटल एसेट्स शामिल होंगे। समूह 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 100 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुका है।
रक्षा स्वदेशीकरण और एयरोस्पेस इकोसिस्टम पर जोर
करण अडानी ने रक्षा स्वदेशीकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि समूह रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) क्षमताओं के विकास पर काम कर रहा है। इस संदर्भ में ब्राज़ील की एयरोस्पेस कंपनी Embraer के साथ साझेदारी का उल्लेख किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारत में एक व्यापक विमानन-रक्षा इकोसिस्टम विकसित करना है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो।
गवर्नेंस सुधार और संगठनात्मक सरलीकरण
तेजी से विस्तार के चलते प्रबंधन की अतिरिक्त परतों से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होने की बात स्वीकार करते हुए करण अडानी ने कहा कि अब संगठनात्मक संरचना को सरल बनाना, परिचालन दक्षता बढ़ाना और निर्णय लेने की गति को तेज करना प्राथमिकता होगी। नियामकीय जांच और मीडिया कवरेज के बाद उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि मजबूत परिचालन बुनियाद, पारदर्शी संवाद और संस्थागतकरण से विश्वसनीयता बढ़ती है और जोखिम कम होता है।
युवा नेतृत्व, AI और विविधता पर फोकस
समूह अपनी औसत कर्मचारी आयु, जो वर्तमान में 38 वर्ष है, को कम करने पर काम कर रहा है ताकि AI और डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाया जा सके।
वर्कफोर्स विविधता में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। महिला कर्मचारियों की भागीदारी 2 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। लगभग 80 प्रतिशत नेतृत्व भूमिकाएं आंतरिक रूप से भरी जाती हैं, जिससे कर्मचारियों को बंदरगाह, हवाई अड्डे, सीमेंट और खनन जैसे विभिन्न वर्टिकल में अवसर मिलते हैं।
डीकार्बोनाइजेशन और हरित पहल
सस्टेनेबिलिटी पर जोर देते हुए करण अडाणी ने कहा कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी और लाभप्रदता साथ-साथ संभव हैं। समूह के तहत बंदरगाह संचालन इस वर्ष अपने ट्रक बेड़ों को डीजल से हरित ईंधन विकल्पों में परिवर्तित कर रहे हैं, जो डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों का हिस्सा है।
फॉर्मूला वन की वापसी में रुचि
ग्रेटर नोएडा स्थित Buddh International Circuit के अधिग्रहण के बाद करण अडाणी ने भारत में फॉर्मूला वन रेसिंग को फिर से शुरू करने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक मानकों को पूरा करते हुए भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को प्रदर्शित करना होगा।
जमीनी अनुभव से आकार लिया नेतृत्व दृष्टिकोण
करण अडाणी ने बताया कि Mundra Port पर अपने शुरुआती करियर के अनुभव ने उनके नेतृत्व और संचालन शैली को आकार दिया। उन्होंने बिना किसी विशेष सुविधा के जमीनी स्तर पर काम किया, जिससे उन्हें संचालन की बारीक समझ मिली। इस संवाद का संचालन Sunil Kant Munjal ने किया, जो हीरो एंटरप्राइज के चेयरमैन और अखिल भारतीय प्रबंधन संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।



