राज्यसभा की कार्रवाई 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इससे पहले शुक्रवार को राज्य सभा में कई सदस्यों ने अपने विचार रखे। सदन में बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि वह प्रस्ताव के माध्यम से सदन के समक्ष यूनिवर्सल बेसिक मिनिमम वेज का प्रस्ताव देना चाहते हैं।
सदन में विशेष उल्लेख के दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को लाने के कई ठोस कारण हैं। पहला कारण यह है कि देश के हर तीन में से एक युवा न तो रोजगार में है, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में। दूसरा कारण, जिनके पास काम है, उनके लिए भी कोई प्रभावी न्यूनतम वेतन सुरक्षा नहीं है। राष्ट्रीय वेतन पिछले एक दशक से लगभग ठहरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि कम वेतन केवल आय की समस्या नहीं है, बल्कि यह उपभोग को दबाता है, मांग को कमजोर करता है, और करोड़ों श्रमिकों को ‘वर्किंग पॉवर्टी’ के चक्र में फंसा देता है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने समाधान प्रस्तावित किए। उन्होंने कहा कि एक एकल, कानूनी रूप से बाध्यकारी, सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन होना चाहिए, जिसके नीचे किसी भी श्रमिक को वेतन न दिया जा सके, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, किसी भी अनुबंध पर हो और देश के किसी भी हिस्से में काम करता हो।
उन्होंने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार को संक्षिप्त नामों से विशेष प्रेम है, तो हमने भी इस योजना का एक नाम सुझाया है ‘उमंग,’ यानी यूनिवर्सल मिनिमम एनुअल नैशनल गारंटी। उन्होंने कहा कि उमंग आशा व सम्मान का प्रतीक है। यदि उमंग को लागू करना है, तो चार बातें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले वेतन कानून के तहत एक बाध्यकारी राष्ट्रीय वेतन फ्लोर अधिसूचित किया जाए। इसे मुद्रास्फीति से स्वत: जोड़ा जाए और हर वर्ष संशोधित किया जाए। दरों और श्रेणियों को सरल बनाया जाए ताकि अनुपालन आसान हो। इसका लाभ सभी श्रमिकों तक पहुंचे। अनुबंध श्रमिक, गिग वर्कर, और विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को इसका लाभ मिले जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कई राज्य सरकारें पहले से यह पहल कर रही हैं। इसका एक उदाहरण बांग्ला युवा शक्ति है। यहां 21 से 40 वर्ष के युवाओं को, यदि वे कक्षा 10 उत्तीर्ण हैं और पांच वर्षों तक रोजगार नहीं मिला है, तो 1500 रुपये प्रतिमाह सीधे उनके बैंक खाते में दिए जाते हैं। यह राशि बिना किसी शर्त के दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह उस राज्य में हो रहा है जो देश में न्यूनतम बेरोजगारी दर वाले शीर्ष पांच राज्यों में है। उन पांच में से तीन विपक्ष शासित राज्य कर्नाटक, झारखंड व पश्चिम बंगाल हैं। दो भाजपा शासित राज्य भी इस सूची में हैं।
उन्होंने कहा, “इसलिए मैं यह नहीं कह रहा कि राज्य सरकारों की नकल कीजिए। मैं यह कह रहा हूं कि उनसे प्रेरणा लीजिए। देश के श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन दीजिए। उन्हें न्यूनतम सुरक्षा दीजिए। उन्हें ‘उमंग’ दीजिए।



