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CG: छोटा ठेला, बड़ी कमाई! कमाल है छत्तीसगढ़ के मोहन का रोज़ 3000 कमाने का सीक्रेट…

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महासमुंद जिले के सरायपाली स्थित जोगनीपाली गांव के मोहन बेहरा का नाश्ता ठेला पिछले 25 वर्षों से कुटेला चौक पर संचालित हो रहा है. यहां समोसा, बड़ा और प्रसिद्ध चावल भजिया मिलती है. 3 रुपये प्लेट से शुरू हुआ यह कारोबार आज 20 रुपये प्लेट तक पहुंच गया है और रोजाना करीब 3 हजार रुपये की आमदनी देता है.

महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत जोगनीपाली गांव में स्थित एक साधारण सा नाश्ते का ठेला आज पूरे इलाके में अपनी खास पहचान बना चुका है. कुटेला चौक पर पिछले 25 वर्षों से लगातार चल रहा यह ठेला मोहन बेहरा द्वारा संचालित किया जा रहा है. स्वाद, ताजगी और किफायती दामों के कारण यह नाश्ता ठेला अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के इलाकों से आने वाले ग्राहकों की पहली पसंद बन गया है.

मिलने वाला नाश्ता हमेशा गरमागरम और ताजा
मोहन बेहरा ने लोकल18 को बताया कि उनका नाश्ते का ठेला रोजाना शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है. इस ठेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मिलने वाला नाश्ता हमेशा गरमा-गरम और ताजा होता है. ग्राहक जैसे ही ऑर्डर देते हैं, वैसे ही समोसा, बड़ा और चावल भजिया तैयार किया जाता है. इसी वजह से लोगों को यहां का स्वाद अलग और बेहतर लगता है.

शाम होते ही कुटेला चौक पर लोगों की भीड़
इस ठेले पर मुख्य रूप से समोसा, बड़ा और चावल भजिया मिलती है, लेकिन इनमें से चावल भजिया पूरे क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. मोहन बेहरा बताते हैं कि कई ग्राहक सिर्फ उनकी चावल भजिया खाने के लिए ही सरायपाली और आसपास के गांवों से आते हैं. शाम होते ही कुटेला चौक पर लोगों की भीड़ लगने लगती है और ठेले के आसपास चहल-पहल बढ़ जाती है.

नाश्ते के साथ यहां तीन प्रकार की चटनियां भी परोसी जाती हैं. टमाटर की चटनी, मीठी चटनी और लहसुन-हरी मिर्च से बनी खास ग्रीन चटनी नाश्ते के स्वाद को और भी लाजवाब बना देती है. ग्राहक बताते हैं कि चटनियों का यह कॉम्बिनेशन समोसा और चावल भजिया के स्वाद को अलग पहचान देता है.

मोहन बेहरा ने बताया कि जब उन्होंने इस नाश्ते के ठेले की शुरुआत की थी, तब एक प्लेट नाश्ता मात्र 3 रुपये में मिलता था. समय के साथ महंगाई बढ़ी, लेकिन आज भी कीमतें आम लोगों की पहुंच में हैं. वर्तमान में 20 रुपये की प्लेट में तीन नग समोसा या बड़ा दिया जाता है. इसी कीमत में चावल भजिया भी उपलब्ध है, जिससे ग्राहकों को भरपेट और स्वादिष्ट नाश्ता मिल जाता है.

इस छोटे से ठेले से रोजाना करीब 3 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. मोहन बेहरा का कहना है कि लोगों को उनके ठेले का टेस्ट, क्वालिटी और क्वांटिटी तीनों ही पसंद आती है. यही वजह है कि कई ग्राहक वर्षों से नियमित रूप से यहां नाश्ता करने आते हैं.

आज यह नाश्ता ठेला सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि इलाके की पहचान बन चुका है. मोहन बेहरा की मेहनत और निरंतरता ने साबित कर दिया है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया काम भी अगर ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ किया जाए, तो वह बड़ी सफलता की कहानी बन सकता है. उनका यह ठेला स्थानीय युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है कि सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है.