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छत्तीसगढ़ में बदलता खेती का पैटर्न, गर्मी में धान की जगह सरसों, मक्का और दलहन की बुवाई…

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ग्रीष्मकालीन धान की जल आवश्यकता दलहन, तिलहन, मक्का की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक होती है। इसी उपलब्ध सिंचाई जल से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का की फसल दो से तीन गुना अधिक क्षेत्र में ली जा सकती है।

गर्मी के मौसम में पानी की बढ़ती किल्लत और लागत में इजाफे को देखते हुए किसान अब धान की खेती से दूरी बना रहे हैं। इसकी जगह सरसों, मक्का और विभिन्न दलहनी फसलों की ओर रुख किया जा रहा है, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन और मुनाफा देने वाली मानी जाती हैं। लगातार घटती वर्षा, भू-जल स्तर में गिरावट तथा बढ़ती हुई सिंचाई लागत जैसी चुनौतियों के बीच कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने शासन द्वारा पहल की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन धान फसल को हतोत्साहित करते हुए कृषकों को दलहन, तिलहन एवं अन्य फसल लेने प्रेरित किया जा रहा है।