Home देश भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: निर्यातकों को मिली राहत…

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: निर्यातकों को मिली राहत…

7
0

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को महत्वपूर्ण राहत मिली है। हालांकि, समझौते से संबंधित विस्तृत जानकारी तब ही सामने आएगी जब इसका ड्राफ्ट जारी होगा।

वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि किन उत्पादों पर कितनी कटौती लागू होगी। रिपोर्टों के अनुसार, भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले लगभग 10 प्रतिशत सामान (लगभग 8.3 अरब डॉलर) पर अभी भी 25 प्रतिशत या उससे अधिक का टैरिफ लागू रहेगा।

रेसिप्रोकल टैरिफ में कमी

अमेरिका ने इस समझौते के तहत रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। लेकिन, सेक्शन 232 के तहत लागू राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित टैरिफ को बरकरार रखा जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ को शून्य करने की दिशा में काम करेगा।

सेक्शन 232 टैरिफ क्यों नहीं हटाया गया?

सेक्शन 232 अमेरिका के 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम का हिस्सा है, जिसके तहत स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटोमोबाइल, तांबा, लकड़ी और कुछ मशीनरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ लगाया जाता है। ट्रंप ने पहले इन उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक ड्यूटी बढ़ाई थी। यह टैरिफ अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों के बावजूद नहीं हटाया जाता। नई डील में केवल रेसिप्रोकल टैरिफ में कमी की गई है, जबकि सेक्शन 232 का टैरिफ पहले की तरह बना रहेगा।

भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता

2024 के यूएन कॉमट्रेड डेटा के अनुसार, भारत ने अमेरिका को 80 अरब डॉलर का निर्यात किया, जिसमें से 8.3 अरब डॉलर (लगभग 10 प्रतिशत) ऐसे सामान थे जो सेक्शन 232 के दायरे में आते हैं। अमेरिका का कुल निर्यात में हिस्सा 18.3 प्रतिशत है, लेकिन इन उत्पादों में यह बढ़कर 22.7 प्रतिशत हो जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भर हैं।

कौन से सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

इस डील का सबसे बड़ा प्रभाव ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा, जिससे 3.9 अरब डॉलर के निर्यात पर असर होगा। स्टील का निर्यात ढाई अरब डॉलर और एल्यूमिनियम का निर्यात लगभग 80 करोड़ डॉलर का है। इन तीनों श्रेणियों का कुल निर्यात 85 प्रतिशत से अधिक प्रभावित होगा। लकड़ी, तांबा और औद्योगिक वाहनों का हिस्सा अपेक्षाकृत कम है।

अमेरिका पर निर्भरता का स्तर

वैश्विक निर्यात में अमेरिका का हिस्सा स्टील में 34 प्रतिशत, एल्यूमिनियम में 37 प्रतिशत और लकड़ी में 39 प्रतिशत तक है। इस उच्च निर्भरता के कारण 25 प्रतिशत टैरिफ भारतीय कंपनियों के लाभ, प्रतिस्पर्धा और निवेश पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापार समझौता एक प्रारंभिक कदम है, लेकिन सेक्शन 232 जैसे टैरिफ के बने रहने से भारतीय निर्यातकों को पूरी राहत नहीं मिलेगी। विशेष रूप से ऑटो, स्टील और एल्यूमिनियम उद्योग पर दबाव बना रहेगा। वर्तमान में, होने वाली डील से सामान्य निर्यात को लाभ हुआ है.