यहां पहले से तीन रेल कॉरिडोर का काम चल रहा है। जो मुख्यतः खनिजों के परिवहन को ध्यान रखकर ही बनाए हुए हैं। इस 458 किलोमीटर के कॉरिडोर को माइनिंग कॉरिडोर सपोर्ट करेगा। इसमें जो सबसे नयी और महत्वपूर्ण बात है वह है कि रायपुर-विशाखापट्टनम में अभी जो 6 लेन इकॉनामिक कॉरिडोर बना है, उससे दंतेवाड़ा-कांकेर और कांकेर से लगी राजनांदगांव जिले की खदानों से आयरन ओर विशाखापट्टनम बंदरगाह तक पहुंचाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर इस माइनिंग कॉरिडोर में शामिल होने वाले जिले होंगे, कोरबा, रायगढ़, सरगुजा, कोरिया ( यहां कोयले का सबसे बड़ा भंडार और गेवरा-कुसमुंडा जैसी दुनिया की बड़ी खदानें हैं) आयरन ओऱ के भंडार वाले जिले कांकेर, दंतेवाड़ा और राजनांदगांव दंतेवाड़ा में बैलाडीला जैसी बड़ी खदान स्थित है।
कैंसर की दवाएं सस्ती
निर्मला सीतारमण ने हेल्थ और मेडिकल सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किये है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि कैंसर से जुड़ी 17 दवाओं में छूट दी जाएगी। इसी तरह सात और जो दुर्लभ बीमारियों की दवाओं में, खास मेडिकल पर्पज के लिए उसके आयात में छूट मिलेगी।
इसी तरह हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बजट में सीतारमण ने 3 नए आयुर्वेदिक एम्स बनाने की घोषणा की। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हास्पीटिलिटी की स्थापना भी होगी। सीतारमण ने बजट में 5 क्षेत्रिय मेडिकल हब बनाने का भी एलान किया। उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि बायो फॉर्मा के लिए 10 हजार करोड़ दिए जाएंगे। लोगों को शूगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए सस्ती दवाएं देंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए मेडिकल सहायता देंगे। डेढ़ लाख सेवाकर्ताओं की बहाली होगी। उन्होंने मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए खास स्कीम का भी ऐलान किया।
इनकम टैक्स पर क्या हुआ बड़ा ऐलान?
इसी तरह सरकार ने छोटे करदाताओं और निवेशकों को राहत देते हुए इनकम टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है। इन बदलावों का मकसद टैक्स अनुपालन को सरल बनाना और करदाताओं की परेशानियां कम करना है।
कम या शून्य TDS के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम
अब कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट के लिए करदाताओं को असेसिंग ऑफिसर के पास आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए एक ऑटोमैटिक, रूल-बेस्ड सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी और टैक्स प्रक्रिया और सरल होगी।
निवेशकों को बड़ी सुविधा
निवेशकों के लिए डिपॉजिटरी अब Form 15G और Form 15H स्वीकार करेंगी। ये फॉर्म सीधे संबंधित कंपनियों को भेजे जाएंगे। इससे उन निवेशकों को खास फायदा होगा, जिनके पास कई कंपनियों की सिक्योरिटीज़ हैं और जिन्हें बार-बार फॉर्म जमा करने की जरूरत पड़ती थी।



