वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में भारत को चिप हब’ बनाने के लिए 40,000 करोड़ रुपए का फंड जारी किया है। यह कदम भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की ओर एक मजबूत कदम बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि, सरकार अब सुधार पे ज्यादा भरोसा करती है।
Semiconductor Mission 2.0 योजना क्यों है ख़ास?
आपकी जानकारी के लिए बता ने कि, पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया विजन को आगे बढ़ाते हुए ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को लॉन्च किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि, सरकार का इस बार पूरा जोर ऐसी मशीनों और सामान को बनाने पर होगा, जिनका डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) पूरी तरह भारतीय हो। इसका मतलब ये है कि, अब भारत दुसरो की नकल नहीं करेगा बल्कि खुद के आविष्कार करेगा। बजट में बताया गया है कि, सरकार द्वारा देश भर में रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे, जहां हमारे युवा चिप बनाने की बारीकियां सीखेंगे।
2026 में शुरू होंगे 4 बड़े प्लांट
यहां बताते चले की, साल 2025 में ही तीन प्लांट्स में पायलट प्रोजेक्ट यानी की ट्रायल शुरू हो चुका है। वहीं इस साल चार बड़े प्लांट में भी काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे ‘मेड इन इंडिया’ चिप बाजार में नजर आने लगेगी। यह सब उस पहले सेमीकंडक्टर मिशन का नतीजा है जो जनवरी 2022 में शुरू हुआ था।
योजना से इन कंपनियों को होगा फायदा
वहीं 40,000 करोड़ रुपए के इस निवेश के बारे में मार्केट एक्सपर्ट दिव्यम मौर्य ने बताया कि, यह निवेश भारत कके लिए गेम चेंजर साबित हो। इससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी और चिप बनाने वाली कंपनियों के लिए लागत भी कम हो जाएगी। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, केन्स टेक्नोलॉजी और सीजी पावर जैसी कंपनियों के लिए यह सुनहरा मौका है। अब ये कंपनियां बड़े स्तर पर चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाएंगी, तो भारत की ग्लोबल मार्केट में साख बढ़ेगी और कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।
खुलेगा रोजगार का नया रास्ता
वहीं, ऐसा भी कहा जा रहा है कि, यह बजट सिर्फ मशीनों के लिए नहीं है। ऐसा भी माना जा रहा है कि, सेमीकंडक्टर के रिसर्च सेंटर खुलेंगे, तो हजारों इंजीनियरों और तकनीकी जानकारों की जरूरत होगी। सरकार का फोकस इंडस्ट्री के साथ मिलकर ट्रेनिंग देने पर है, ताकि युवाओं को सीधे नौकरी मिल सके। यह मिशन भारत को एक ऐसी ताकत बना देगा जहां हम दुनिया को चिप एक्सपोर्ट कर पाएंगे।



