भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट…
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित…
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के नाम से जाना जा रहा है, क्योंकि यह अब तक के सबसे बड़े और प्रभावशाली व्यापार समझौतों में से एक होगा।
इसकी औपचारिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की जा सकती है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्विट्जरलैंड के दावोस में इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह डील 27 EU देशों को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ प्रदान करेगी और दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है।
EU टॉप लीडर्स की भारत यात्रा
24 जनवरी: उर्सुला वॉन डेर लेयेन दोपहर 2:40 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगी। शाम 6 बजे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से होटल इंपीरियल में मुलाकात करेंगी।
26 जनवरी: गणतंत्र दिवस परेड में EU प्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो भारत-EU संबंधों की गहराई को दर्शाएगा।
27 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन, राष्ट्रपति से मुलाकात और प्रेस कॉन्फ्रेंस में डील का ऐलान होगा। इस दौरान ट्रेड, टेक्नोलॉजी, जलवायु संरक्षण और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की जाएगी।
28 जनवरी: EU लीडर्स वापस लौटेंगे।
डील के प्रमुख फायदे
2024-25 में भारत-EU द्विपक्षीय व्यापार ₹11.8 लाख करोड़ ($136.5 अरब) था, जो इस समझौते के बाद 200 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
भारत के टेक्सटाइल्स, ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल्स के एक्सपोर्ट में वृद्धि होगी।
EU से कार्स, वाइन, मशीनरी और अन्य उत्पादों पर टैरिफ में कमी आएगी, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ते विकल्प मिलेंगे।
लाखों नई नौकरियों और स्टार्टअप्स के लिए बड़े निवेश के अवसर उत्पन्न होंगे।
अमेरिका के उच्च टैरिफ (50% तक) के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक मार्केट उपलब्ध होगा, जिससे भारत की निर्भरता घटेगी।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति प्रदान करेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करेगी। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि FTA से चीन, रूस और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी और 2 अरब लोगों का बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई है।
27 जनवरी को होने वाला ऐलान भारत-EU संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा।



