छत्तीसगढ़ में साय सरकार के दो वर्ष पूरे होना केवल एक प्रशासनिक पड़ाव नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक और विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इन दो वर्षों में सरकार ने जनकल्याण, सुशासन और विकास को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए कई अहम फैसले लिए, जिनका असर शासन-प्रशासन से लेकर आम जनता तक साफ तौर पर दिखाई देता है। साय सरकार की सबसे बड़ी पहचान सुशासन को लेकर रही है। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए कई ठोस कदम उठाए गए। इतना ही नहीं साय सरकार ने छत्तीसगढ़ में निवेश और औघोगिक विकास को भी बराबर प्राथमिकता दिया है।
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला प्रदान करती है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा और कृषि आधारित संसाधनों के कारण यह राज्य औद्योगिक निवेश के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में राज्य सरकार की नीतियों और प्रयासों से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली है। साय सरकार के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ अब केवल कोर सेक्टर तक सीमित नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मा, डिफेंस, एयरोस्पेस और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक उद्योगों का राष्ट्रीय केंद्र बनने के लिए तैयार है। निवेशकों का आकार्षित करने के लिए सरकार ने वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 भी लागू किया है।
350 से अधिक संरचनात्मक सुधार लागू
छत्तीसगढ़ सरकार उद्योगों के लिए सरल, पारदर्शी और तेज प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को आवश्यक स्वीकृतियाँ अब न्यूनतम समय में प्राप्त हो रही है, जिससे प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत हो रहा है। साय सरकार ने डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक संरचनात्मक सुधार लागू किए गए हैं, जिनसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस में अभूतपूर्व सुधार हुआ। प्रदेश में निवेश का वातावरण इतना सशक्त हुआ कि कुछ महीनों में साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास में रिकॉर्ड है। मुंबई, बेंगलुरु में आयोजित इंवेस्टर्स समिट से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भारी उत्साह दिखाया। दिल्ली समिट में 15,184 करोड़ रूपए, मुंबई में 6,000 करोड़ रूपए और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में वृहद निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025 में 1,63,749 करोड़ रूपए का निवेश आकर्षित किया, जो भारत के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है।
सरकार ने बनाई नई नई औद्योगिक नीति
औघोगिक विकास के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30, जो एक नवंबर 2024 से लागू हुई, ने राज्य को निवेशकों के लिए अनुकुल बना दिया है। इस नीति का मूल मंत्र न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन है, जिसके तहत उद्योगों को स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं ने उद्यमियों के लिए छत्तीसगढ़ में कारोबारी माहौल को आसान किया है। पॉलीमैटेक कंपनी को सेमीकंडक्टर निवेश के लिए मात्र तीन महीनों में ज़मीन आवंटित कर एनओसी जारी की गई और अब कंपनी ने 1,143 करोड़ रूपए के प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ कर दिया है, जहां प्रतिवर्ष 10 अरब चिप उत्पादन का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य नवा रायपुर को सिलिकॉन वैली ऑफ छत्तीसगढ़’ के रूप में स्थापित करना है। नई औद्योगिक नीति में अगले पांच वर्षों में 5 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने का रोडमैप है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, फार्मा, एआई, डिफेंस, ऊर्जा और मेडिकल टूरिज्म – इन सभी क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ अगले दशक की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनेगा।



