राज्य कर्मचारी संघ के अधिवेशन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महंगाई भत्ते से जुड़ी यह बड़ी घोषणा की थी. उन्होंने केंद्र के समान DA की मांग को मंजूरी दी थी. जिसके बाद आज (बुधवार) इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया गया.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की थी.
छत्तीसगढ़ सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि का आदेश जारी कर दिया है. एक जनवरी 2026 से इसका लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी घोषणा की थी. अब इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है. सीएम साय ने राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कर्मचारियों को एक जनवरी 2026 से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा. राज्य के सरकारी कर्मचारियों को केंद्र के समान 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा. इससे पहले महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत था.
बीते रविवार को राज्य कर्मचारी संघ के अधिवेशन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महंगाई भत्ते से जुड़ी बड़ी घोषणा की थी. उन्होंने केंद्र के समान डीए की मांग को मंजूरी दी थी. जिसके बाद शासन द्वारा आज यानी बुधवार को इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया गया. अब महंगाई भत्ता 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी मिलेगा. कर्मचारियों की बाकी मांगों के लिए राज्य सरकार द्वारा कमेटी का गठन किया गया है. कर्मचारी फेडरेशन लंबे समय से कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा था.
आर्थिक मजबूती का बनेगा सहारा
गौरतलब है कि राज्य सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर सरकारी कर्मचारियों की जेब से जुड़ा है और बढ़ती महंगाई के दौर में उन्हें आर्थिक मजबूत करेगा. कर्मचारी संगठन लंबे समय से केंद्र के बराबर डीए की मांग कर रहा था. मुख्यमंत्री साय की इस घोषणा ने साफ कर दिया था कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की अपेक्षाओं और उनकी मांगों को गंभीरता से ले रही है और उनकी समस्याओं को हल करने में प्राथमिकता दे रही है.
सरकार और कर्मचारियों के बीच भरोसे की मजबूती
राज्य सरकार के महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला केवल सैलरी स्लिप तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह सरकार और कर्मचारियों के बीच भरोसे को भी मजबूत करेगा. दरअसल छत्तीसगढ़ में करीब 3.9 लाख सरकारी अफसर और कर्मचारी डीए बढ़ोतरी से लाभान्वित होंगे. महंगाई भत्ता 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी होने से सैलरी में सीधा इजाफा होगा. ऐसे समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो रही हैं, सरकार का यह कदम कर्मचारियों के लिए संबल माना जा रहा है.



