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मनरेगा को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से की तीन मांगें

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मनरेगा योजना का नाम बदलने का कांग्रेस छत्तीसगढ़ में विरोध कर रही है. रविवार को कांग्रेसियों ने उपवास रखा.

मनरेगा को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन 

छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासत गरमा गई है. मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आज मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है. रायपुर में शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता गांधी प्रतिमा के सामने उपवास पर बैठे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला.

टीएस सिंहदेव और विजय जांगिड़ रहे मौजूद

इस प्रदर्शन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और छत्तीसगढ़ के सह प्रभारी विजय जांगिड़ भी शामिल हुए. दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर सुनियोजित तरीके से मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि यह हमला सीधे तौर पर गरीबों, मजदूरों और किसानों के हक पर किया जा रहा है.

रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन

मनरेगा से गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमानकांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह राष्ट्रपिता का अपमान है. यह ग्रामीण भारत की आत्मा पर चोट है. उन्होंने कहा कि इससे साफ हो गया है कि केंद्र सरकार की नीयत मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की है.

मनरेगा के नए प्रावधानों से बजट में होगी कटौती

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है, मजदूरी भुगतान में भारी देरी हो रही है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है. इसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार पर पड़ रहा है और गांवों में काम के अवसर तेजी से घट रहे हैं. कांग्रेस नेताओं ने दो टूक कहा कि यह सरकार की गरीब विरोधी और मजदूर विरोधी नीति है, जिसे पार्टी कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने ऐलान किया कि मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध सड़कों से लेकर संसद तक किया जाएगा.

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से की तीन मांगें

कांग्रेस ने मांग की कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए, योजना में किए गए सभी जनविरोधी बदलाव रद्द किए जाएं और ग्रामीण मजदूरों को काम और मजदूरी की पूरी गारंटी सुनिश्चित की जाए.कांग्रेस ने बताया कि पार्टी ने साफ किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध गांव से लेकर संसद तक लगातार जारी रहेगा.