छुरिया। बेमौसम बारिश और तेज आंधी-तूफान ने छुरिया क्षेत्र के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में पानी भर गया है। धान कटाई के मुहाने पर खड़े किसानों के लिए यह बारिश दोहरी मार बनकर आई है। कई जगहों पर पककर तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है, तो वहीं कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल पानी में डूब गई है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
किसानों का दर्द: अंकुरित होने का डर और उत्पादन में गिरावट की आशंका
क्षेत्र के किसानों ने बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की दास्तां बयां की है।
ग्राम पेण्ड्रीडीह के किसान धन्नालाल यादव ने बताया कि उनकी 2 एकड़ में कटी हुई धान की फसल पानी में डूबने से अब उसके अंकुरित होने की आशंका सता रही है, जबकि खड़ी फसल भी तेज हवा से गिर गई है।
ग्राम भोलापुर के किसान महेंद्र साहू और मोरकुटूमब के मयाराम साहू का कहना है कि उनकी दो-दो एकड़ धान की फसल गिर जाने से इस बार उत्पादन में भारी कमी आएगी।
बखरूटोला के पदमभूषण साहू, बैरागीभेड़ी के हेतराम साहू और कल्लूटोला के किसान इंदर राम मंडावी ने भी लगभग 14 एकड़ सहित बड़े पैमाने पर फसल क्षति की जानकारी दी है। क्षेत्र के अन्य किसानों का भी यही हाल है।
किसानों ने बताया कि 90 दिन में तैयार होने वाली धान की फसल पूरी तरह पक चुकी थी और किसान कटाई की तैयारी में थे, वहीं 120 दिन की फसल भी पकने की कगार पर थी। ऐसे वक्त में हुई बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
खरीदी केंद्रों में धान की गुणवत्ता को लेकर भी बढ़ी चिंता
फसल को खेतों से बचाने के बाद भी किसानों की मुसीबतें कम नहीं होने वाली हैं। भीगी हुई धान को सुखाकर सुरक्षित करना और उसे समर्थन मूल्य पर खरीदी केंद्रों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों को इस बात का डर सता रहा है कि नमी अधिक होने या दानों का रंग फीका पड़ने पर उन्हें धान बेचने में परेशानी आ सकती है। यदि धान रिजेक्ट हुआ, तो उन्हें अतिरिक्त आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा देने की पुरजोर मांग
खेती-किसानी में बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर भारी भरकम लागत लगाने वाले अन्नदाताओं ने अब शासन-प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। किसानों ने मांग की है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम भेजकर प्रभावित खेतों का जल्द से जल्द सर्वेक्षण कराया जाए। नुकसान का वास्तविक आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा और राहत राशि प्रदान की जाए, ताकि इस आपदा से उनकी बिगड़ी आर्थिक स्थिति को संबल मिल सके।



