स्वच्छता मित्रों की सुरक्षा में छत्तीसगढ़ पूरे देश में नंबर 1*
15 हजार से ज्यादा लोगों ने मनाया नमस्ते दिवस*
नमस्ते योजना हासिल की बड़ी उपलब्धि*
कचरा बीनने वालों को भी योजना से जोड़ा*
आपात स्थिति में तुरंत मदद के लिए 47 यूनिट*
छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता मित्रों की सुरक्षा और सम्मान के क्षेत्र में देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
केंद्र सरकार की नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान पर रहा है।
छत्तीसगढ़ के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित काम का माहौल देने, उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने और सफाई के जोखिम भरे कामों में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
‘नमस्ते’ योजना में मिली यह रैंकिंग इसी दिशा में किए जा रहे कामों का परिणाम है।
इस योजना का उद्देश्य है कि सफाई का काम करने वाले व्यक्ति की जान जोखिम में न पड़े। इसके लिए कर्मचारियों की पहचान और सत्यापन से लेकर सुरक्षा किट, स्वास्थ्य कार्ड, प्रशिक्षण, आपातकालीन मदद और मशीनों के इस्तेमाल तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश अनुसार प्रदेश में अब तक 1,487 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण किया गया है। इनमें से 1,465 कर्मियों का सत्यापन पूरा हो चुका है।
प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 1,428 कर्मियों को PPE किट दी जा चुकी हैं। इससे सफाई के दौरान सफाई मित्रों को जरूरी सुरक्षा उपकरण मिल रहे हैं। वहीं 1,374 सफाई मित्रों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ सकें।
सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए 139 सीवर एवं सेप्टिक टैंक सफाई मित्रों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही 923 स्वच्छता मित्रों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया है।
इस साल 14 जुलाई को छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में ‘नमस्ते’ दिवस मनाया गया था।
इसमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता मित्रों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। उन्हें व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया। उनका सम्मान किया गया और PPE किट तथा आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किए गए।
नमस्ते योजना का दायरा सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों तक सीमित नहीं है। कचरा बीनने वाले यानी वेस्ट पिकर्स भी इससे जुड़े हैं।
छत्तीसगढ़ में अब तक 8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है। इनमें से 6,799 का सत्यापन पूरा हो चुका है। 991 वेस्ट पिकर्स को PPE किट दी गई हैं और 512 को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 6,287 और वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है।
सफाई के दौरान किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके, इसके लिए राज्य में 47 Emergency Response Sanitation Units यानी ERSU स्थापित की गई हैं।
इनमें 14 नगर निगमों, 24 जिला मुख्यालयों और 9 दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें से 39 ERSU को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
इसके साथ ही 14420 हेल्पलाइन भी संचालित है। ERSU और 14420 हेल्पलाइन के जरिए आपात स्थिति में तेज और सुरक्षित स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार की गई है।
नमस्ते योजना के तहत राज्यों के प्रदर्शन को 100 अंकों के पैमाने पर परखा गया है।
इसके तहत स्वच्छता कर्मियों की प्रोफाइलिंग और सत्यापन के लिए 20 अंक निर्धारित थे। SUY के माध्यम से सफाई के काम में मशीनों के इस्तेमाल के लिए 10 अंक, ERSU और 14420 हेल्पलाइन के संचालन के लिए 20 अंक तय किए गए।
वहीं, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए 20 अंक, सफाई के दौरान होने वाली मौत के मामलों में कार्रवाई, मुआवजा और जवाबदेही के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए थे।
इस मूल्यांकन में सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामलों के लिए नकारात्मक अंक का भी प्रावधान रखा गया।
निर्धारित मानकों के आधार पर छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है।
क्या है नमस्ते योजना? भारत सरकार ने वर्ष 2023 में ‘नमस्ते’ योजना शुरू की थी।
इसका मकसद सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका देना है।
योजना में सफाई के काम में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने, असुरक्षित तरीके से हाथ से सफाई की प्रथा को खत्म करने और सफाई के दौरान होने वाली मौतों को शून्य यानी Zero Fatality तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मी (SSW), कचरा बीनने वाले (Waste Pickers), नाली साफ करने वाले तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) में काम करने वाले कर्मियों को शामिल किया गया है।
योजना को आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) मिलकर चला रहे हैं।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) इसकी राष्ट्रीय स्तर की कार्यान्वयन एजेंसी है।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सभी शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से योजना को जमीन पर लागू कर रहा है।



