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भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा निवेश और उद्देश्य कृत्रिम मेधा का विकास समझौता ज्ञापनों का महत्व चिप निर्माण की तकनीक…

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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रणधीर ठाकुर ने बताया कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा काफी मजबूत दिखाई दे रही है। सेमीकॉन 2.0 के तहत नीतिगत स्थिरता से उद्योग की कार्ययोजना में महत्वपूर्ण निरंतरता बनी हुई है।

भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में देश का पहला वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण संयंत्र और असम के जागीरोड में पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण सुविधा स्थापित कर रही है।

निवेश और उद्देश्य

इन दोनों परियोजनाओं में कुल 14 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करना है। ठाकुर ने ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के अवसर पर एक साक्षात्कार में कहा, “हमारे व्यवसाय में निरंतरता अत्यंत महत्वपूर्ण है और सेमीकंडक्टर एक कार्ययोजना आधारित यात्रा है। यह देखना उत्साहजनक है कि सेमीकंडक्टर 1.0 योजना के बाद सरकार ने सेमीकंडक्टर 2.0 की शुरुआत की है।

हमारा मानना है कि जैसे-जैसे हम नकदी प्रवाह उत्पन्न करेंगे, हम लगातार निवेश करते रहेंगे और इसे आगे बढ़ाते रहेंगे।”

कृत्रिम मेधा का विकास

ठाकुर ने कृत्रिम मेधा (एआई) के संदर्भ में कहा कि सेमीकंडक्टर हार्डवेयर और कंप्यूटिंग क्षमता में प्रगति ने एआई अनुप्रयोगों और मॉडल के विकास को गति दी है। उन्होंने एआई के बढ़ते उपयोग में सेमीकंडक्टर उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “इसकी नींव हार्डवेयर है।”

गुजरात और असम में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि धोलेरा का विनिर्माण संयंत्र और जागीरोड की पैकेजिंग सुविधा दोनों सरकार के साथ तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।

समझौता ज्ञापनों का महत्व

ठाकुर ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा हस्ताक्षरित 16 समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसमें उपकरण, बुनियादी ढांचा, गैस एवं रसायन और प्रतिभा विकास शामिल हैं।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये (11 अरब डॉलर) के निवेश से विनिर्माण संयंत्र का निर्माण कर रही है।

चिप निर्माण की तकनीक

300 मिलीमीटर (12 इंच) के इस संयंत्र में 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तक की प्रौद्योगिकी नोड पर सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण किया जाएगा। इनका उपयोग वाहन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटिंग एवं डेटा भंडारण, वायरलेस संचार और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाएगा।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम के जागीरोड में भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग सुविधा के लिए तीन अरब डॉलर का निवेश कर रही है।