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किसानों के लिए 8 प्रमुख योजनाएं, खेती से लेकर सिंचाई और पशुपालन तक मिलेगा लाभ…

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छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को मजबूत, आधुनिक और किसान-केंद्रित बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को आधुनिक तकनीक, सिंचाई, कृषि मशीनरी, डिजिटल सेवाओं और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ना है।

कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि यंत्रीकरण, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी योजनाओं से प्रदेश के किसानों को अलग-अलग स्तर पर लाभ मिल रहा है।

सरकार की ओर से किसानों को सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए DBT (Direct Benefit Transfer) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं एग्रीस्टैक, ई-केवाईसी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कौन-कौन सी 8 प्रमुख योजनाएं हैं और इनका लाभ किस तरह लिया जा सकता है।

1. कृषक उन्नति योजना

छत्तीसगढ़ सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजनाओं में कृषक उन्नति योजना शामिल है। इस योजना के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन और कृषि आय बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। संदर्भ के अनुसार खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों को डीबीटी (DBT) के माध्यम से 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। इससे किसानों को खेती की लागत पूरी करने और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने में आर्थिक सहायता मिल रही है।

2. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के पात्र किसानों को भी मिल रहा है। इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे उन्हें कृषि संबंधी छोटे खर्चों को पूरा करने में सहायता मिलती है। छत्तीसगढ़ में 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है।

3. कृषि यंत्रीकरण योजना

खेती में श्रम और समय की बचत तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के साथ सामूहिक रूप से मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए फार्म मशीनरी बैंक भी स्थापित किए गए हैं। अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं किसानों को सामूहिक रूप से कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं।

4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

सिंचाई की सुविधा बढ़ाने और पानी की बचत के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत करीब 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। इससे पानी की बचत के साथ फसलों की सिंचाई दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

5. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

कम लागत में खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है। राज्य में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है। इससे किसानों की खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

6. उद्यानिकी और हाईटेक खेती

छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फल, सब्जी और अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसके अलावा ऑयल पाम और बांस रोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाईटेक नर्सरी, पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर है।

7. पशुपालन और डेयरी से जुड़ी योजनाएं

कृषि के साथ पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर भी सरकार का जोर है। किसानों और ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के लिए दुग्ध उत्पादन, डेयरी भुगतान व्यवस्था और पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य में मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे पशुपालकों को अपने क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है।

8. मत्स्य पालन को बढ़ावा

कृषि के साथ मत्स्य पालन को भी किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। संदर्भ के अनुसार छत्तीसगढ़ का मत्स्य उत्पादन करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन तक पहुंच गया है। इससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन की भूमिका मजबूत हो रही है।