राजनांदगांव। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। भगवान श्रीराम, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की सीमाओं जैसे गंभीर विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए प्रस्तुत करना उनकी हताशा और निराशा को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण सदियों की करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान है। जहां तक मंदिर की सुरक्षा का प्रश्न है, उसकी सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय और अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है। किसी भी घटना की जांच और दोषियों पर कार्रवाई कानून के अनुसार होती है। ऐसे मामलों को आधार बनाकर पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाना केवल सस्ती राजनीति है।
इसी प्रकार, भारत की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर देश की सेना और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता और मजबूती से कार्य कर रही हैं। सीमा संबंधी विषय अत्यंत संवेदनशील हैं और उन पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देना देशहित में नहीं है।
निगम नेता प्रतिपक्ष कहते हैं कि “देश का चौकीदार विफल हो गया”, जबकि सच्चाई यह है कि आज भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ी है, सीमाओं पर आधारभूत संरचना का अभूतपूर्व विकास हुआ है और राष्ट्रीय सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है। केवल राजनीतिक विरोध के लिए तथ्यहीन आरोप लगाना जनता को भ्रमित करने का असफल प्रयास है।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनकी पहली जिम्मेदारी राजनांदगांव शहर की समस्याओं पर ध्यान देना है। शहर की सड़कें, स्वच्छता, पेयजल, यातायात, नालियां और नागरिक सुविधाओं पर गंभीर चिंतन करने के बजाय वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर केवल बयानबाजी कर अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चिंतन करने के लिए देश में अनेक सक्षम लोग और संस्थाएं हैं। नेता प्रतिपक्ष यदि वास्तव में जनता की चिंता करते हैं, तो उन्हें पहले राजनांदगांव की जनता की समस्याओं और नगर निगम में अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी सकारात्मक राजनीति और विकास में विश्वास करती है। राजनांदगांव की जनता भी समझती है कि कौन जनसेवा कर रहा है और कौन केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहा है। जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि विकास, जवाबदेही और जनहित के कार्य चाहिए।



