भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में मुस्लिम समुदाय के लिए मस्जिदें होना आम बात हैं. लेकिन भारत के पड़ोसी देश भूटान में एक ऐसी स्थिति है जो कई लोगों को हैरान कर सकती है. यहां मुस्लिम आबादी मौजूद होने के बावजूद पूरे देश में एक भी मस्जिद नहीं है.
भूटान दक्षिण एशिया का एक छोटा और खूबसूरत हिमालयी देश है, जो अपनी संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और खुशहाली के लिए जाना जाता है. इस देश की ज्यादातर आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है. हालांकि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग भी रहते हैं.
क्या है वजह?
जानकारी के मुताबिक, भूटान में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या बहुत कम है. यही वजह है कि यहां अब तक किसी मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि मुस्लिमों को अपनी नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है. सरकार और स्थानीय प्रशासन ने उनके लिए खास प्रार्थना कक्ष की व्यवस्था की हुई है. भूटान की राजधानी थिम्फू के पास सेमटोखा इलाके में एक ऐसा प्रार्थना स्थल मौजूद है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग प्रार्थना कक्ष बनाए गए हैं. यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं. इसी परिसर में हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों के लिए भी प्रार्थना की व्यवस्था है.
क्यों है खास?
भूटान में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है और सभी समुदायों को अपने-अपने धर्म का पालन करने की छूट है. हालांकि देश में मस्जिद निर्माण को लेकर अब तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है. इसके पीछे मुस्लिम आबादी का बेहद कम होना बड़ी वजह माना जाता है. दिलचस्प बात ये है कि भूटान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश नहीं है जहां मस्जिद नहीं है. कुछ और छोटे देशों में भी मस्जिदों का अभाव देखा गया है. हालांकि सोशल मीडिया पर अक्सर ये दावा किया जाता है कि भूटान दुनिया का पहला ‘मस्जिद-मुक्त’ देश है, लेकिन इसके बावजूद भी वहां बड़े ही आराम से नमाज पढ़ी जाती है.



