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8th Pay Commission: क्या कभी सैलरी की बराबरी कर पाएगी पेंशन?  क्यों की जा रही यह डिमांड? 

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8th Pay Commission News: पेंशनर्स का कहना है कि जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, मेडिकल ट्रीटमेंट पर खर्च बढ़ रहा है, दवाइयां महंगी हो रही हैं, उन्हें देखते हुए उम्र-आधारित पेंशन दी जानी चाहिए.

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर बहस ते हो रही है क्योंकि सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी- आयोग की सिफ़ारिशों से पहले ही अपनी मांगें रख रहे हैं. जहां वेतन में बदलाव, फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते पर जोरो-शोरों से चर्चाएं हो रही हैं. वहीं रिटायर हो चुके सरकारी कर्मचारियों ने अब एक अहम प्रस्ताव रखा है, जो देश के पेंशन ढांचे को बदल सकता है.

कई पेंशनभोगी संगठन सरकार से उम्र से जुड़ी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिससे रिटायर लोगों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ पेंशन का फायदा भी धीरे-धीरे बढ़ेगा. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इससे केंद्र सरकार के लाखों रिटायर कर्मचारियों और फ़ैमिली पेंशनभोगियों को काफी आर्थिक राहत मिल सकती है.

क्या कभी सैलरी की बराबरी कर पाएगी पेंशन?

सरकारी कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल जेसीएम (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले पैनल के सामने उम्र-आधारित (Age Based Pension Structure) का फॉर्मूला पेश किया है. इसके तहत उम्र 90 साल या उससे ऊपर हाने पर पेंशन निश्चित रूप से सैलरी की बराबरी तक पहुंच सकती है. नहीं, तो सामान्य परिस्थितियों में पेंशन कभी भी शुरुआती स्तर पर एक्टिव वर्किंग सैलरी की बराबरी नहीं कर पाएगी क्योंकि हमारे देश के पेंशन स्ट्रक्चर में इसका कैलकुलेशन कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन (Last Pay Drawn) के अधिकतम 50% हिस्से पर ही आधारित होती है.

क्यों की जा रही यह डिमांड?

पेंशनभोगी संगठनों की मुख्य मांग है कि उम्र से जुड़ी एक ऐसी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए, जिसमें उम्र बढ़ने के साथ पेंशन भी बढ़े। इस प्रस्ताव के अनुसार, रिटायर होने वाले व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ मिलने वाली पेंशन का प्रतिशत भी बढ़ना चाहिए. इससे उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के बढ़ते खर्चों, महंगाई और बुढ़ापे में अकसर आने वाली आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी. इस प्रस्ताव का समर्थन करने वालों का तर्क है कि रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों को इलाज और जीवन-यापन पर काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है इसलिए आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए समय-समय पर पेंशन बढ़ाना जरूरी है.

उम्र के साथ पेंशन बढ़ने का फॉर्मूला

पेंशनभोगी संगठनों ने संसदीय स्थायी समिति का हवाला देते हुए हर पांच साल में पेंशन में बढ़ोतरी की मांग की है.

65 साल की उम्र पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 70%

70 साल की उम्र पर अंतिम मूल वेतन का 75%

75 साल की उम्र पर अंतिम मूल वेतन का 80%

80 साल की उम्र पर अंतिम मूल वेतन का 85%

85 साल की उम्र पर अंतिम मूल वेतन का 90%

90 या उससे अधिक की उम्र पर अंतिम मूल वेतन का 100% (यानी सैलरी के बराबर पेंशन)

अगर इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है, तो इससे ज्यादा उम्र के पेंशनभोगियों, खासकर 80 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए आर्थिक मदद में काफी सुधार होगा.