भारतीय राजनीति में यह कहावत फिर सच साबित होती दिख रही है कि किसी भी राजनीतिक दल को कभी खत्म नहीं माना जा सकता. एक तरफ केरल में वाम दलों की सरकार सत्ता से बाहर हो गई, तो दूसरी ओर तमिलनाडु में थलापति विजय की पार्टी टीवीके सरकार बनाने के लिए वाम दलों के समर्थन पर निर्भर नजर आ रही है. टीवीके को बहुमत के लिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है और ऐसे में CPI तथा CPI(M) अहम भूमिका में आ गए हैं. CPI ने समर्थन पर फैसला लेने के लिए अपनी राज्य कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई है. पार्टी के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि विजय के पत्र का जवाब दिया जाएगा. विधानसभा चुनाव में CPI और CPI(M) ने दो-दो सीटें जीती हैं. विजय ने धर्मनिरपेक्ष सरकार के नाम पर दोनों वाम दलों से समर्थन मांगा है.
केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ गठबंधन ने 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज लेफ्ट पार्टियों के आखिरी किले का ढहा दिया है. केरल देश का ऐसा राज्य है जहां सबसे पहली बार वामदलों की सरकार बनी थी. इत्तेफाक देखिए केरल ही वो राज्य है जहां वामदलों की अंतिम सरकार रही. 10 साल तक सत्ता में रहे वामदलों के गठबंधन एलडीएफ को 35 सीट से संतोष करना पड़ा. वहीं बीजेपी ने तीन सीट जीती है.
पश्चिम बंगाल में 2011 में ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद करीब 35 साल बाद वामदलों की सरकार उखड़ गई थी. इसके बाद त्रिपुरा में बीजेपी ने वामदलों की सरकार को हराया था. अब केरल में कांग्रेस ने वामदलों की सरकार को हराकर वामदलों को देश के राज्यों में सत्ता से पूरी तरह बेदखल कर दिया है.
69 साल पहले पहली बार केरल में बनी थी वामदलों की पहली सरकार
भारत में वाम दलों की पहली सरकार केरल में ही बनी थी. साल 1957 में हुए विधानसभा चुनाव में कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने जीत हासिल की और ईएमएस नंबूदिरिपाद देश के पहले कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री बने थे. यह दुनिया का भी पहला मौका था जब किसी कम्युनिस्ट सरकार ने लोकतांत्रिक चुनाव के जरिए सत्ता हासिल की थी. नंबूदरीपाद ने 5 अप्रैल 1957 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
नेहरू ने बर्खास्त किया था वामदल की पहली सरकार
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में केरल की पहली कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त किया गया था. यह सरकार नंबूदरीपाद के नेतृत्व में 1957 में बनी थी. साल 1959 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए इस सरकार को हटा दिया. इसके पीछे मुख्य वजह राज्य में बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक विरोध बताया गया. कांग्रेस, चर्च संगठनों, नायर सर्विस सोसाइटी और कई अन्य समूहों ने सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया, जिसे विमोचन समरम कहा गया.
विरोधियों का आरोप था कि कम्युनिस्ट सरकार शिक्षा सुधार और भूमि सुधार के नाम पर तानाशाही रवैया अपना रही है. राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने और व्यापक असंतोष का हवाला देते हुए केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था. यह बर्खास्तगी भारतीय राजनीति में काफी चर्चित रही, क्योंकि यह पहली बार था जब किसी निर्वाचित राज्य सरकार को अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त किया गया.
विजय की सरकार बनाने के लिए वामदलों की जरूरत
कहा जाता है कि राजनीति में अगर कोई राजनीतिक दल अस्तित्व में तो उसे कभी भी समाप्त नहीं समझा जाना चाहिए. लोकतांत्रिक व्यवस्था में किस राजनीतिक दल की कब हालात पलट जाए कोई नहीं जानता. यही हालत मौजूदा वक्त की राजनीति में देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां केरल में वामदलों की आखिरी सरकार उखड़ी तो दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को बहुमत का नंबर जुटाने के लिए वाम दलों के समर्थन की जरूरत है. यानी वामदलों के समर्थन से अगर थलापति विजय की सरकार बनती है तो वामदल एक बार फिर से किसी राज्य की सत्ता में वापसी कर पाएगी. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके को सबसे ज्यादा 108 सीटें मिली हैं, लेकिन यह बहुमत के नंबर से 10 सीट कम है. कांग्रेस की तरफ से पांच सीटों का समर्थन दे दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सरकार बनाने के लिए पांच विधायकों की जरूरत है. थलापति विजय ने दो सीटों से जीत दर्ज की है, इस हिसाब से टीवीके के 107 विधायक ही होते हैं.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने शुक्रवार को अपनी राज्य कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई, जिसमें चुनाव के बाद तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार बनाने में समर्थन देने पर फैसला किया जाएगा. पार्टी ने यह जानकारी दी. पार्टी की तमिलनाडु इकाई के सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि उनकी पार्टी टीवीके प्रमुख विजय के समर्थन मांगने वाले पत्र का जवाब देगी. सीपीआई ने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीतीं हैं. इसके अलावा वामदलों के एक अन्य घटक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) ने भी तमिलनाडु में दो सीटें जीती हैं. विजय थलापति ने उनसे भी धर्म निरपेक्ष सरकार के नाम पर समर्थन मांगा है.
उधर, थोल थिरुमावलवन के नेतृत्व वाली विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) शुक्रवार को बैठक करेगी और सरकार गठन में विजय की टीवीके को समर्थन देने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेगी. वीसीके, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की भरोसेमंद सहयोगी रही है और दोनों दल कई चुनाव साथ मिलकर लड़ चुके हैं. 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दो सीटें जीती हैं. थिरुमावलवन ने कहा कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को समर्थन देने पर वीसीके कोई ‘‘जादुई फैसला’’ नहीं ले सकती. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से टीवीके के समर्थन अनुरोध पर किया जाने वाला विचार-विमर्श निश्चित रूप से वामपंथी दलों के फैसले के अनुरूप होगा. वीसीके के नवनिर्वाचित विधायक और पार्टी की उच्चस्तरीय समिति आज बैठक कर चुनाव बाद गठबंधन पर निर्णय लेने वाली है.



