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ऑस्ट्रेलिया की Queensland University of Technology के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खास मटेरियल तैयार किया है जो इंसानी शरीर की गर्मी को बिजली में बदल सकता है. यह एक सॉफ्ट और लचीला जेल है जिसे पहनने वाले डिवाइस में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मकसद है कि भविष्य में स्मार्ट डिवाइस बैटरी पर कम निर्भर रहें.
कैसे काम करता है यह जेल?
यह खास जेल शरीर से निकलने वाली गर्मी को पकड़कर उसे इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदल देता है. आमतौर पर यह गर्मी वातावरण में खत्म हो जाती है लेकिन यह नई तकनीक उसे बेकार जाने से रोकती है. जब शरीर और आसपास के तापमान में फर्क होता है तो जेल के अंदर मौजूद आयन (चार्ज्ड पार्टिकल्स) मूव करते हैं जिससे बिजली पैदा होती है.
हाइड्रोजेल की खासियत
यह मटेरियल एक तरह का हाइड्रोजेल है यानी इसमें पानी मौजूद होता है और यह काफी नरम और खिंचने वाला होता है. इसी वजह से इसे शरीर पर पहनना आसान और आरामदायक है. यह पारंपरिक थर्मोइलेक्ट्रिक मटेरियल्स से अलग है जो आमतौर पर कठोर, महंगे और बनाने में मुश्किल होते हैं.
कितनी बिजली बना सकता है?
लैब में किए गए परीक्षणों में इस जेल से बना एक छोटा सा डिवाइस जिसका आकार सिर्फ 10×10 मिलीमीटर था, लगभग 0.46 वोल्ट बिजली पैदा करने में सफल रहा. भले ही यह मात्रा कम लगे लेकिन यह दिखाता है कि भविष्य में इसे और बेहतर बनाकर ज्यादा पावर हासिल की जा सकती है.
पहनने वाले डिवाइस के लिए बड़ा बदलाव
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फिटनेस बैंड, हेल्थ मॉनिटर या स्मार्ट कपड़ों जैसे डिवाइस बिना बैटरी के या बहुत कम बैटरी के साथ काम कर सकते हैं. यानी आपको बार-बार चार्ज करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
सिर्फ पहनने तक सीमित नहीं
यह तकनीक सिर्फ वियरेबल डिवाइस तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल उन जगहों पर भी किया जा सकता है, जहां बहुत ज्यादा गर्मी बेकार चली जाती है जैसे फैक्ट्री या इंडस्ट्रियल सेटअप. इससे बिजली की बचत और बेहतर इस्तेमाल भी संभव हो सकता है.
भविष्य में बिजली बचत का नया रास्ता
दुनिया भर में काफी मात्रा में ऊर्जा गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है. ऐसे में यह नई खोज उस बेकार एनर्जी को दोबारा इस्तेमाल करने का एक स्मार्ट तरीका हो सकता है. “वैज्ञानिकों का मानना है कि यह” टेक्नोलॉजी भविष्य में बिजली बचत और पर्यावरण के लिए अहम भूमिका निभा सकती है.



