Home देश सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए किताब लेखन पर नए नियमों पर विचार…

सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए किताब लेखन पर नए नियमों पर विचार…

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सरकार रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारियों के लिए किताब लिखने के संबंध में सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव उन सीनियर आर्मी अधिकारियों पर लागू होगा, जिन्होंने उच्च सरकारी पदों पर कार्य किया है।

इन अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद कम से कम 20 वर्षों का कूलिंग-ऑफ पीरियड बिताना होगा, जिसके दौरान वे अपनी किताबें या व्यक्तिगत अनुभव साझा नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में जल्द ही एक औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है।

इसका कारण क्या है?

यह निर्णय पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड ऑटोबायोग्राफी, ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के संदर्भ में चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। अगस्त 2020 में भारत-चीन के बीच लद्दाख में हुई सैन्य झड़पों के बारे में किताब में किए गए दावों पर हाल ही में संसद में गर्म बहस हुई है।

सरकार की स्थिति

यह मुद्दा शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा का विषय बना। हालांकि इसे आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन कई मंत्रियों ने सुझाव दिया कि प्रभावशाली पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले लंबा कूलिंग-ऑफ पीरियड अनिवार्य होना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

नरवणे की किताब पर विवाद का कारण

नरवणे की किताब पर विवाद तब बढ़ा जब 2 फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में आत्मकथा का उल्लेख किया। सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। इसके बाद राहुल गांधी ने संसद में किताब की एक प्रति लाकर इसकी मौजूदगी साबित करने की कोशिश की। इसके तुरंत बाद किताब का एक PDF सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।

पब्लिशर की प्रतिक्रिया

पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि किताब का कोई भी हिस्सा, चाहे वह प्रिंट में हो या डिजिटल, अवैध तरीके से फैलाया जा रहा है, जो कॉपीराइट का उल्लंघन है। पब्लिशर ने स्पष्ट किया कि वह ऐसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

इस बयान के कुछ घंटे पहले, दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके बाद मंगलवार को नरवणे ने अपनी चुप्पी तोड़ी और पब्लिशर के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी किताब न तो प्रकाशित हुई है और न ही किसी भी रूप में सार्वजनिक की गई है।