इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों ने छुईखदान स्थित पान अनुसंधान केंद्र में पान की चाय विकसित की है. यह चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और बीपी, शुगर व पाचन संबंधी समस्याओं में लाभकारी मानी जा रही है. पूरी तरह हर्बल इस चाय को 12 टी बैग 100 रुपये और 100 ग्राम लूज पैक 200 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है.
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पान की चाय अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. छत्तीसगढ़ के छुईखदान स्थित पान अनुसंधान केंद्र के माध्यम से यह विशेष पान चाय तैयार की जा रही है, जिसे वैज्ञानिकों के सतत मार्गदर्शन में विकसित किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह चाय स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी है और कई बीमारियों में सहायक साबित हो सकती है.
चाय ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने में सहायक
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर की डॉ पुष्पा परिहार ने बताया कि पान की चाय को पहली बार पीने पर ही इसका स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग केवल स्वाद के पीछे नहीं बल्कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने वाले उत्पादों की तलाश कर रहे हैं. ऐसे समय में पान की चाय एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आई है. यह चाय न केवल स्वादिष्ट है बल्कि इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण इसे स्वास्थ्यवर्धक भी बनाते हैं. डॉ पुष्पा परिहार के अनुसार पान की चाय ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है. इसके साथ ही यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है. नियमित सेवन से यह शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने का कार्य करती है.
पाचन तंत्र के लिए काफी लाभकारी
पान अनुसंधान केंद्र छुईखदान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ भागवत प्रसाद असाटी ने बताया कि पान की चाय तैयार करने का मुख्य उद्देश्य पान को केवल माउथ फ्रेशनर के रूप में नहीं बल्कि पोषण के रूप में पहचान दिलाना है. उन्होंने कहा कि पान पाचन तंत्र के लिए काफी लाभकारी माना जाता है और इसमें कैल्शियम, आयरन सहित कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं.
पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत
डॉ असाटी ने बताया कि सनातन धर्म में भी पान को एक पवित्र पौधा माना गया है और इसका धार्मिक महत्व भी है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे हर्बल उत्पाद के रूप में विकसित किया गया है ताकि बीपी, डायबिटीज और श्वसन संबंधी समस्याओं में इसका उपयोग किया जा सके. रोजाना पान की चाय का सेवन करने से पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत मिल सकती है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पान की चाय को पूरी तरह हर्बल तरीके से तैयार किया गया है और इसमें किसी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य लोगों को एक प्राकृतिक और सुरक्षित स्वास्थ्य पेय उपलब्ध कराना है.
कीमत की बात करें तो पान चाय के 12 नग टी बैग की कीमत 100 रुपये रखी गई है, जबकि 100 ग्राम लूज पान चाय 200 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है. इसे छुईखदान स्थित पान अनुसंधान केंद्र के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में पान की चाय न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य पेय के रूप में पहचान बना सकती है. यह नवाचार स्थानीय कृषि उत्पादों को नया बाजार देने के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा.



