असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कमर कस ली है. पार्टी ने राज्य में 100 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है और इसी को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयारी की जा रही है.
इस रणनीति का अहम हिस्सा बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को मजबूत करना है.
इसी क्रम में शनिवार (14 फरवरी 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुवाहाटी का दौरा करेंगे. इस दौरान वह राज्य के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के एक विशाल सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इस सम्मेलन में करीब 1 लाख बूथ कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है. पार्टी का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी संगठन को नई ऊर्जा देगी.
बूथ कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत-बीजेपी
बीजेपी नेतृत्व का साफ कहना है कि बूथ कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत होते हैं. वोटर से सीधा संपर्क रखने वाले यही कार्यकर्ता चुनाव में जीत की नींव रखते हैं. सम्मेलन का मकसद कार्यकर्ताओं में जोश भरना, संगठन को और मजबूत करना और चुनावी रणनीति को साफ तौर पर जमीन तक पहुंचाना है. इसके साथ ही पार्टी ने प्रवासी कार्यकर्ताओं को भी विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारी दी है. ये कार्यकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और वहां की राजनीतिक स्थिति, जनता की राय और स्थानीय मुद्दों की जानकारी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा रहे हैं. इसी फीडबैक के आधार पर बीजेपी अपनी आगे की चुनावी रणनीति तय कर रही है.
अमित शाह का असम दौरा
बीजेपी की तैयारी यहीं नहीं रुकी है. गृहमंत्री अमित शाह हाल ही में असम दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने पार्टी के कोर ग्रुप नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की थी. सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह 21 फरवरी को एक बार फिर असम का दौरा कर सकते हैं. इस दौरे में वह फिर से पार्टी नेताओं से मुलाकात कर अब तक की तैयारियों और जमीनी हालात का फीडबैक लेंगे. बीजेपी असम में संगठन, कार्यकर्ता और नेतृत्व—तीनों स्तरों पर मजबूत रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लगातार दौरे यह संकेत देते हैं कि पार्टी इस चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती.



