छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा है कि इसमें देश के किसी भी वर्ग को राहत नहीं मिली. उनका कहना है कि बजट की दिशा प्रतिगामी है और इसमें कृषि, उद्योग, रोजगार तथा शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों के लिए कोई ठोस और दूरगामी प्रावधान नजर नहीं आते.
भूपेश बघेल ने विशेष रूप से मध्यम वर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे आम लोगों की राहत की उम्मीद टूट गई. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इस बजट में शराब महंगी और मछली सस्ती हो गई, लेकिन देश के समग्र विकास को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया.
बजट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को भी उन्होंने सरकार की आर्थिक नीति पर अविश्वास का संकेत बताया.
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्य को किसी तरह का विशेष लाभ नहीं दिया और उसे बड़े कॉरपोरेट घरानों, खासकर अडानी समूह के भरोसे छोड़ दिया गया है.
उन्होंने कहा कि जब भी प्रधानमंत्री या गृहमंत्री छत्तीसगढ़ आते हैं, तो राज्य के आम मुद्दों के बजाय उद्योगपतियों से जुड़ी योजनाओं पर अधिक जोर दिया जाता है.
धान खरीदी के मसले पर बघेल ने राज्य की डबल इंजन सरकार को घेरते हुए कहा कि समय पर खरीदी न होने से किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए. उन्होंने दावा किया कि कई भाजपा नेता भी अपना धान नहीं बेच पाए.
साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे किसानों से जबरन समर्पण कराया गया, जबकि बड़े किसानों को टोकन तक नहीं मिल सके. अवैध शराब के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया.
कुल मिलाकर, भूपेश बघेल ने बजट को आम जनता और राज्यों की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाला बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.



