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नेशनल लोक अदालत में 307495 प्रकरण से अधिक मामले निपटाए गए…

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वर्ष के तृतीय नेशनल लोक अदालत में 307495 प्रकरण से अधिक मामले निपटाए गए**

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान, माननीय मुख्य संरक्षक**

महोदय/मुख्य न्याधिपति, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर, छत्तीसगढ़**

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशन एवं माननीय प्रधान जिला**

न्यायाधीश/अध्यक्ष, श्री विजय कुमार होता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजनांदगांव के निर्देशन में दिनांक 12.09.2026 को नेशनल लोक अदालत का शुभारम्भ माॅ सरस्वती के तैलचित्र में दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया, जिसमें माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के न्यायाधीश, राजनांदगांव जिला न्यायालय के समस्त न्यायाधीश, अधिवक्ता संघ, राजनांदगांव के अध्यक्ष, लीड बैंक राजनांदगांव, बैंक अधिकारी, नगरपालिका अधिकारी, बीएसएनएल अधिकारी, अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारी एवं पैरालीगल वालेन्टियर्स उपस्थित हुए।

आज आयोजित नेशनल लोक अदालत, सर्वोच्च न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक के न्यायालयों में लोक अदालत आयोजित की गयी। जिला राजनांदगांव, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चैकी एवं जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई में न्यायालय में लंबित, राजस्व न्यायालय एवं प्री-लिटिगेशन के 304034 प्रकरणों को निराकरण के लिये चिन्हित किया गया है। माननीय श्री विजय कुमार होता, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजनांदगांव, के नेतृत्व में लोक अदालत के आयोजन की सभी तैयारी पूर्ण कर ली गयी थी। नेशनल लोक अदालत आयोजित करने के लिए कुल-48 खंडपीठों का गठन किया गया। इस लोक अदालत में 307495 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।

निराकृत किए गए मामलों में कुल 304034 मामले प्री-लिटिगेशन चरण के थे और 3461 मामले ऐसे थे जो विभिन्न न्यायालयों में लंबित थे, निपटान राशि लगभग 33ए930ए278ए740/- रूपये रहा।

मामले न्यायालय में लंबित प्री-लिटिगेशन कुल

  • सुनवाई किये गये 3866 306265 310131
  • निपटान किये गये 3461 304034 307495
  • निपटान मूल्य (रुपये में) 56ए682ए393 33ए873ए596ए347 33ए930ए278ए740

उपरोक्त नेशनल लोक अदालत में आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित मामले, धारा-138 एनआई एक्ट से संबंधित मामले अर्थात् चेक से संबंधित मामले, वैवाहिक विवाद के मामले, श्रम विवाद के मामले, बैंक ऋण वसूली वाद, रूपया वसूली वाद, नगर निगम से संबंधित कर वसूली मामले, विद्युत बिल एवं टेलीफोन बिल के मामले, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले, राजस्व न्यायालय के मामले एवं अन्य राजीनामा योग्य वाद आदि से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई।

नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में निराकृत हुए प्रकरणों की सफल कहानियाॅ

01- राजीनामा होने से साथ-साथ रहने हुए राजी

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा निर्धारित नेशनल लोक अदालत दिनांक 12.09.2026 के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव द्वारा जिला राजनांदगांव में आयोजित की गई। नेशनल लोक अदालत के आयोजन अवसर पर न्यायालय माननीय-न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, (श्री उत्तरा कुमार कश्यप), राजनांदगांव के न्यायालय में लंबित विविध दांडिक प्रकरण क्र.-114/2026, पक्षकार श्रीमती सेवती बाई व अन्य विरूद्ध बेनलाल वर्मा, आवेदिका एवं अनावेदक का विवाह दिनांक 11.11.2011 को संपन्न हुआ था।

उनके दाम्पत्य जीवन से पुत्र तेजकुमार वर्मा जन्म दिनांक 01.06.2015 को हुआ है। विवाह के कुछ दिन बाद अनावेदक, आवेदिका क्र.-1 से शराब पीकर शारीरिक एवं मानसिक रूप से दहेज देने के लिए प्रताड़ित करके अमानवीय रूप से मारपीट करने लगा और दिनांक 12.05. 2026 को आवेदकगण को मारपीट कर घर से निकाल दिया। जिसके कारण पृथक रहने के पश्चात् आवेदिका ने स्वयं के लिए भरण-पोषण राशि दिलाए जाने बाबत् प्रकरण पेश की।

उभयपक्ष के मध्य राजीनामा की कार्यवाही की गई, जो सफल रही। उभयपक्ष के मध्य आपसी राजीनामा हो चुका है, अतः प्रकरण नेशनल लोक अदालत समाप्त किया गया।

02- राजीनामा होने से साथ-साथ रहना कबूल किया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा निर्धारित नेशनल लोक अदालत दिनांक 12.09.2026 के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव द्वारा जिला राजनांदगांव में आयोजित की गई। नेशनल लोक अदालत के आयोजन अवसर पर न्यायालय माननीय-न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, (श्री उत्तरा कुमार कश्यप), राजनांदगांव के न्यायालय में लंबित व्यवहार वाद प्रकरण क्र.-130ए/2025, पक्षकार बैनू कुमार देवांगन विरूद्ध श्रीमती दिव्या उर्फ गायत्री, आवेदिका एवं अनावेदक का विवाह दिनांक 20.04.2021 को संपन्न हुआ। उनके दाम्पत्य जीवन से पुत्र भावेश देवांगन का जन्म हुआ है। प्रतिवादी हमेशा वादी और उसके परिवार वालों को छोटी-छोटी बातों पर वाद-विवाद कर मायके जाने की धमकी देती थी और अधिकतर समय मायके में निवास करती थी। दिनांक 02.06.2026 को प्रतिवादी अवयस्क पुत्र भावेश को लेकर बिना कारण बताए मायके चली गई और वादी के साथ उसके घर आने से इंकार कर दी। प्रतिवादी बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कारण के उसे दाम्पत्य सुखों से वंचित कर रखी है। वादी, प्रतिवादी के साथ दाम्पत्य जीवन निवर्हन करना चाहता है। उभयपक्ष के मध्य राजीनामा की कार्यवाही की गई, जो सफल रही।

राजीनामा होने से साथ-साथ निवास कर रहे हैं। उभयपक्ष के मध्य आपसी राजीनामा हो चुका है, अतः प्रकरण नेशनल लोक अदालत समाप्त किया गया।

03- नेशनल लोक अदालत में राजीनामा के आधार पर लड़ाई-झगड़ा हुआ पटाक्षेप।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा निर्धारित नेशनल लोक अदालत दिनांक 12.09.2026 के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजनांदगांव द्वारा तालुक विधिक सेवा समिति, छुईखदान में आयोजित की गई नेशनल लोक अदालत के आयोजन अवसर पर न्यायाधीश (श्वेता पटेल) छुईखदान के न्यायालय में सीआईएस नं-279/2020, पक्षकार छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ध मनोज साहू, उक्त प्रकरण में प्रार्थी के नाबालिग लड़के शशिकांत साहू का साईकल से गिरने को लेकर आरोपी मनोज साहू के साथ विवाद हो गया था। उभयपक्ष को समझाईश दी गई, जिस पर वे राजीनामा के लिए सहमत हुए।

न्यायालय कक्ष में उभयपक्ष ने एक-दूसरे से गले लगाया, राजीखुशी अपने-अपने घर चल गए।

04- नेशनल लोक अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा का प्रकरण समाप्त

मामला खंडपीठ क्रमांक 02, पीठासीन अधिकारी, श्री विजय कुमार होता, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजनांदगांव के न्यायालय का है। प्रकरण में वादीगण ने प्रतिवादीगण के विरूद्ध संविदा के विनिर्दिष्ट परिपालन, आधिपत्य एवं स्थायी निषेधाज्ञा जारी किए जाने का वाद प्रस्तुत किया था। दिनांक 12.09.2026 को लोक अदालत में उभयपक्षों की ओर आदेश-23 नियम 3 व्य.प्र.सं. का समझौता आवेदन पत्र प्रस्तुत कर डिक्री दिए जाने का अनुरोध किया था।

प्रकरण में राजीनामा हो जाने के आधार पर मामले का शमन हो गया और वादीगण और प्रतिवादी क्रमांक-1, भूमि बेचने के लिए किए गए सौदा के समय एग्रीमेंट की राशि दस लाख रू. को उसमें ब्याज जोड़ते हुए रू. 10,60,000/- अदा करने की शर्त पर राजीनामा हो गया है। राजीनामा होने से प्रकरण नेशनल लोक अदालत में समाप्त किया गया।