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भूकंप-सुनामी में अब नहीं होगा नुकसान! वैज्ञानिकों ने एक ऐसा डैम्पिंग सिस्टम तैयार किया…

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भूकंप आने पर सबसे बड़ी चिंता इमारतों के हिलने और उनके कमजोर पड़ने की होती है। तेज झटकों के दौरान अक्सर बिजली की सप्लाई भी प्रभावित हो जाती है। ऐसे में अगर किसी इमारत का सेफ्टी सिस्टम बिजली या बैटरी पर निर्भर हो, तो उसके काम करने को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसा डैम्पिंग सिस्टम तैयार किया है, जो बिना बिजली, सेंसर या इलेक्ट्रॉनिक चिप के काम कर सकता है।

वैज्ञानिकों ने स्टील की गोलियों यानी Steel Balls की मदद से एक ऐसा मैकेनिकल डैम्पर विकसित किया है, जो भूकंप के दौरान इमारत में पैदा होने वाली कंपन की ऊर्जा को कम करने में मदद करता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी बाहरी पावर सोर्स की जरूरत नहीं होती।

कैसे काम करता है स्टील बॉल डैम्पर?

यह डिवाइस देखने में एक खोखले सिलेंडर जैसी होती है, जिसके अंदर बड़ी संख्या में स्टील की छोटी-छोटी गेंदें रखी जाती हैं। इसके बीच में एक Shaft लगी होती है, जिस पर विशेष तरह की रॉड संरचना होती है।

जब भूकंप के कारण इमारत हिलती है, तो डैम्पर भी उसके साथ गति करता है। इस दौरान Shaft के अंदर मौजूद रॉड स्टील बॉल्स के बीच से गुजरती है। गेंदों के आपस में टकराने और रगड़ने से Friction पैदा होता है।

यही घर्षण भूकंप से पैदा होने वाली कुछ मैकेनिकल एनर्जी को अवशोषित करने में मदद करता है और इमारत की कंपन को कम करने का काम करता है।

सेंसर और बिजली की जरूरत नहीं

आधुनिक भूकंपरोधी प्रणालियों में कई बार सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हाइड्रोलिक कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे सिस्टम को काम करने के लिए किसी न किसी तरह की बाहरी ऊर्जा की जरूरत हो सकती है।

इसके विपरीत, स्टील बॉल डैम्पर पूरी तरह मैकेनिकल सिद्धांत पर आधारित है। जैसे ही इमारत में कंपन शुरू होता है, डिवाइस की आंतरिक संरचना अपने आप सक्रिय हो जाती है। इसमें न सेंसर की जरूरत है और न किसी सॉफ्टवेयर या बैटरी की।

बिजली गुल होने की स्थिति में भी काम करने की क्षमता

भूकंप जैसी आपदा के दौरान बिजली का ग्रिड और दूसरे कम्युनिकेशन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे समय में किसी पैसिव यानी बिना बाहरी ऊर्जा वाले सिस्टम का फायदा यह होता है कि उसे सक्रिय करने के लिए बिजली की जरूरत नहीं पड़ती।

यही वजह है कि इस तकनीक को भूकंपरोधी सुरक्षा के क्षेत्र में एक संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह अभी रिसर्च और टेस्टिंग के चरण में है और इसे मौजूदा भूकंपरोधी प्रणालियों का सीधा विकल्प मानना जल्दबाजी होगी।

शुरुआती लैब टेस्ट में मिले अच्छे नतीजे

लैब टेस्टिंग में इस डैम्पर ने करीब 14 प्रतिशत का Damping Ratio दर्ज किया। इसका अर्थ यह नहीं है कि डिवाइस भूकंप के 14 प्रतिशत झटकों को सीधे खत्म कर देती है। Damping Ratio यह बताता है कि कोई सिस्टम कंपन की ऊर्जा को कितनी प्रभावी तरीके से कम करता है।

शुरुआती प्रयोगों के बाद वैज्ञानिक अब इसकी क्षमता को बड़े स्तर पर जांचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए Shake Table जैसे नियंत्रित परीक्षणों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि अलग-अलग परिस्थितियों में डिवाइस के प्रदर्शन को समझा जा सके।

कम लागत और आसान रखरखाव का दावा

इस डिवाइस का डिजाइन अपेक्षाकृत सरल है। पारंपरिक और जटिल डैम्पिंग सिस्टम की तुलना में इसके निर्माण और रखरखाव की लागत कम होने की संभावना बताई जा रही है।

इसकी एक और खासियत यह है कि किसी एक हिस्से में खराबी या घिसावट आने पर पूरी यूनिट को बदलने के बजाय संबंधित पार्ट को बदला जा सकता है। इससे रखरखाव का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

पुरानी इमारतों के लिए भी हो सकती है उपयोगी

दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी पुरानी इमारतें मौजूद हैं, जिन्हें आधुनिक भूकंपरोधी मानकों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था। ऐसी इमारतों को पूरी तरह गिराकर दोबारा बनाना काफी महंगा और मुश्किल हो सकता है।

अगर आगे के परीक्षणों में यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो इसे मौजूदा इमारतों में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना तलाशी जा सकती है। इससे पुरानी संरचनाओं को मजबूत बनाने के नए विकल्प मिल सकते हैं।

सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है संभावित इस्तेमाल

इस तरह की मैकेनिकल डैम्पिंग तकनीक का इस्तेमाल उन जगहों पर भी किया जा सकता है, जहां कंपन को नियंत्रित करने की जरूरत होती है। संभावित क्षेत्रों में मोबाइल टावर, औद्योगिक मशीनरी और कुछ परिवहन संरचनाएं शामिल हो सकती हैं।

हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल से पहले संबंधित परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों के अनुसार अलग से परीक्षण जरूरी होगा।

अब आगे क्या करेंगे वैज्ञानिक?

रिसर्चर्स अब अलग-अलग आकार की स्टील बॉल्स और रॉड्स के संयोजन का परीक्षण करने पर ध्यान दे रहे हैं। इसका उद्देश्य यह समझना है कि कौन सा डिजाइन कंपन की ऊर्जा को सबसे बेहतर तरीके से कम कर सकता है।

फिलहाल यह तकनीक शुरुआती रिसर्च चरण में है, लेकिन इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसका सरल और पैसिव डिजाइन है। अगर बड़े पैमाने पर होने वाले परीक्षणों में इसके नतीजे सकारात्मक रहते हैं, तो भविष्य में बिना बिजली वाले डैम्पिंग सिस्टम भूकंपरोधी इंजीनियरिंग में एक उपयोगी विकल्प बन सकते हैं।