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सावन : भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व…

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भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के महीने में श्रद्धालु शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना चाहिए या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ने पर सामान्य तौर पर रोक नहीं बताई जाती, जबकि कुछ विशेष तिथियों और सोमवार को बेलपत्र तोड़ने से बचने की परंपरा है।

एकादशी पर बेलपत्र तोड़ सकते हैं?

प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़कर भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है। एकादशी पर मुख्य रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ने को लेकर मनाही की बात कही जाती है, जबकि बेलपत्र के लिए अलग नियम बताए गए हैं।

हालांकि अलग-अलग परंपराओं और ग्रंथों में बेलपत्र तोड़ने की निषिद्ध तिथियों की सूची में कुछ अंतर मिलता है। इसलिए पूजा-पद्धति का पालन करने वाले लोग अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दे सकते हैं।

किन दिनों बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं में सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति जैसे दिनों में बेलपत्र तोड़ने से बचने की सलाह दी जाती है। लिंगपुराण से संबंधित उद्धरणों में भी सोमवार और कुछ तिथियों पर बिल्वपत्र न तोड़ने की बात मिलती है।

कुछ स्रोत द्वादशी को भी बेलपत्र न तोड़ने की परंपरा बताते हैं, इसलिए एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी पड़ने पर इस नियम को मानने वाले भक्त पहले से बेलपत्र तोड़कर रख सकते हैं।

सोमवार को क्या करें?

सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन बड़ी संख्या में भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। लेकिन मान्यता है कि सोमवार को बेलपत्र तोड़ना नहीं चाहिए। इसलिए यदि सोमवार को शिव पूजा करनी है तो रविवार को ही बेलपत्र तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहले से तोड़ा हुआ बेलपत्र पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे सामान्य फूल-पत्तियों की तरह जल्दी बासी नहीं माना जाता।

बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान

बेलपत्र साफ और अच्छी स्थिति वाला होना चाहिए। पूजा के लिए बेलपत्र तोड़ते समय पौधे को नुकसान न पहुंचाने का ध्यान रखें। यदि किसी निषिद्ध दिन ताजा बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पहले से तोड़े हुए बेलपत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में पहले चढ़ाए गए बेलपत्र को साफ जल से धोकर दोबारा शिवलिंग पर अर्पित करने की भी अनुमति बताई गई है।