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चीन के बाद भारत ‘एपीएसी’ में सबसे बड़ा डेटा सेंटर मार्केट…

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भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) में चीन के बाद सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाजार बनकर उभरा है। पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता चार गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट हो गई है।

यह जानकारी शुक्रवार को जारी डेटा में दी गई।

ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस (बीएनईएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के लिए मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन मौजूद है। देश में 1.3 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है, जबकि 3.2 गीगावाट की अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन, बिजली और निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल की जा चुकी हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “ऊर्जा की उपलब्धता और फाइबर कनेक्टिविटी के मामले में मजबूत स्थिति भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए पसंदीदा स्थान बनाती है।”

महाराष्ट्र भारत का सबसे प्रमुख डेटा सेंटर बाजार बना हुआ है। देश में लाइव आईटी क्षमता के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है और कुल क्षमता में इसकी हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल कर चुकी परियोजनाओं की सबसे बड़ी पाइपलाइन भी महाराष्ट्र में है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर क्षेत्र के अगले चरण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, क्योंकि कंपनियां इन राज्यों में बड़े निवेश और परियोजनाओं की घोषणा कर रही हैं।

घरेलू कारोबारी समूहों ने भारत में डेटा सेंटर विकास के लिए 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो कुल घोषित निवेश का 45 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया, “वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट अगला सबसे बड़ा निवेशक समूह हैं, जिन्होंने 84 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। घोषित कुल निवेश का लगभग 95 प्रतिशत बड़े हाइपरस्केल एआई कैंपस पर केंद्रित है।”

ब्लूमबर्गएनईएफ को उम्मीद है कि भारत में डेटा सेंटर की बिजली मांग 2025 में 11 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 2035 में 91 टेरावाट-घंटे हो जाएगी, यानी इसमें आठ गुना से अधिक की वृद्धि होगी।

रिपोर्ट में कहा गया, “अगले 3 से 10 वर्षों में निर्माणाधीन हाइपरस्केल क्षमता के चालू होने के साथ बिजली की खपत बढ़ेगी। कई हाइपरस्केलर कंपनियों ने 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य तय किए हैं, इसलिए अक्षय बिजली के इस्तेमाल में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।”

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2021 से अब तक 7.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी है।