Tamil Nadu Election: 23 अप्रैल को तमिलनाडु में 85% मतदान हुआ. 234 सीटों के मतदाता तय करेंगे कि विजय थलापति को सत्ता मिलेगी या नहीं. वैसे भी तमिलनाडु में पॉलिटिक्स और फिल्म इंडस्ट्री का नाता पुराना है.
तमिलनाडु की सियासत में फिल्मी सितारों का हमेशा से एक अलग ही जादू रहा है. एमजी रामचंद्रन (MGR) से लेकर जयललिता तक ने इस जादू को सत्ता की कुर्सी पर बिठाया है. इसी कड़ी में अब सुपरस्टार जोसेफ विजय, जिन्हें ‘थलपति’ के नाम से जाना जाता है, पूरी तरह से फिल्मों को छोड़कर अपनी पार्टी तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) के साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं. फिलहाल, उनके पक्ष में ‘स्टार पावर’ की एक लहर तो है, लेकिन सत्ता तक पहुंचना एक कठिन गणितीय समस्या बना हुआ है. एक्सप्लेनर में समझते हैं कि मतदान तक उनका सफर कैसा रहा और कहां-कहां हालात खराब हुए…
सवाल 1: विजय की राजनीतिक एंट्री और चुनाव प्रचार की रणनीति कैसी रही?
जवाब: तमिल सिनेमा के दिग्गज अक्सर फिल्मी पर्दे से सीधे सत्ता के गलियारों में कदम रखते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर का प्रभाव सीमित ही रहा. हालांकि, विजय इस मामले में अलग हैं. उन्होंने 2 फरवरी 2024 में अपनी पार्टी TVK बनाई और यह साफ कर दिया कि राजनीति में पूर्णकालिक रूप से उतरने के लिए वह फिल्मों को पूरी तरह अलविदा कह देंगे. 2026 की शुरुआत में रिलीज़ हुई उनकी फिल्म जन नायगन को उनकी आखिरी फिल्म बताया गया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि जनता के लिए उनका समर्पण अब पूरी तरह से राजनीति के लिए है.
विजय ने 3 रणनीति पर फोकस किया:
युवाओं पर फोकस: पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि विजय का सबसे मजबूत कनेक्शन शहरी और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं से है, जो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों से इतर एक नया चेहरा देखना चाहते हैं.
स्पष्ट राजनीतिक रुख: विजय ने अपनी पार्टी की विचारधारा को ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय’ पर आधारित बताया. अपने आखिरी चुनावी भाषण में उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारे राजनीतिक दुश्मन DMK है और हमारे वैचारिक दुश्मन BJP है.’ इस स्टैंड पर वह पूरे चुनाव में डटे रहे. उन्होंने अल्पसंख्यकों और सभी धर्मों को बराबर सम्मान देने की बात भी कही.
दमदार वादे: विजय ने सत्ता में आने के तुरंत बाद कई लोकलुभावन घोषणाएं कीं, जिनमें प्रति घर 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, महिला सुरक्षा और नशा उन्मूलन के लिए विशेष कानून लाना शामिल है.
चुनावी रैली के दौरान विजय को देखने उमड़ी भीड़
सवाल 2: क्या विजय के चुनाव प्रचार के दौरान बड़े हादसे हुए?
जवाब: विजय के चुनावी अभियान को दो बड़ी दुर्घटनाओं ने काफी प्रभावित किया, जिसने क्राउड मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए:
करूर भगदड़: एक काला दिन
27 सितंबर 2025 को विजय की ‘वेलिचम वेलियेरु’ (रोशनी का आगमन) रैली के दौरान करूर जिले के वेलुसामीपुरम में जो हुआ, वह तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बन गया. शाम करीब 7:45 बजे विजय के भाषण के दौरान उनकी एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ अचानक बैरिकेडिंग की ओर उमड़ पड़ी. इस अफरातफरी में भगदड़ मच गई. इस हादसे में कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए. मृतकों में एक 2 साल का बच्चा भी शामिल था. यह हादसा कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक परिवार ने इसी सदमे में अपने दो और सदस्य खो दिए.
प्रशासन के अनुसार, करीब 30,000 लोगों की अनुमति वाली जगह पर 60,000 के करीब भीड़ जमा हो गई थी. सत्तारूढ़ DMK ने आयोजकों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि विजय और TVK ने इसे एक साजिश या प्रशासनिक विफलता करार दिया. विजय ने कहा कि वह पुलिस के दिए गए समय पर ही वहां पहुंचे थे, जिसका पूरी दुनिया ने लाइव प्रसारण देखा.
विजय की करुर में रैली के दौरान भगदड़ मची थी
अप्रैल 2026 में मतदान के दिन की अफरा-तफरी
बीती 23 अप्रैल को जब पूरे राज्य में वोट डाले जा रहे थे, तब विजय ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर गंभीर स्थिति का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सार्वजनिक परिवहन के अभाव में हजारों मतदाता कोयम्बेडु और किलंबाक्कम जैसे प्रमुख बस अड्डों पर फंसे रह गए और अपने मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए. अफरा-तफरी का माहौल बन गया. उन्होंने मतदान का समय रात 8 बजे तक बढ़ाने और इमरजेंसी बसें चलाने की मांग की, ताकि वोट डालने का संवैधानिक अधिकार छीना न जाए.
सवाल 3: क्या विजय ने चुनाव में पीड़ितों के लिए कुछ किया?
जवाब: करूर भगदड़ के सात महीने बाद भी पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ. कई परिवार चुपचाप अपना जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से दूरी बनाए हुए हैं. एक पीड़ित ने कहा, ‘मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता… मैं नहीं जानता कि असली न्याय कभी मिलेगा या नहीं.’ हालांकि, क्षेत्र के कई स्थानीय लोग इसे सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा मानते हैं और उनकी नाराजगी व्यवस्थागत खामियों पर ज्यादा है, न कि विजय के लिए. TVK और DMK सरकार ने पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी. विजय ने व्यक्तिगत रूप से 37 परिवारों से मुलाकात करके संवेदना व्यक्त की.
सवाल 4: विजय थलापती के लिए चुनावी समीकरण क्या कहते हैं?
जवाब: यह चुनाव मुख्य रूप से त्रिकोणीय रहा. एक तरफ सत्तारूढ़ DMK गठबंधन, दूसरी तरफ AIADMK-BJP गठबंधन और तीसरी ताकत बनकर उभरी विजय की TVK. फिलहाल चुनावी समीकरणों के 2 निचोड़ निकलते हैं:
- वोट शेयर का अनुमान: कई राजनीतिक पंडितों का मानना है कि विजय की पार्टी शुरुआती 10-12% के अनुमान से बढ़कर अब लगभग 20% वोट शेयर हासिल कर सकती है. यह किसी भी नई पार्टी के लिए शानदार शुरुआत होगी.
- बहुमत की राह मुश्किल: तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 234 में से 118 सीटें चाहिए, जिसके लिए 30-35% वोट शेयर की जरूरत होती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि विजय का सीधे तौर पर सत्ता में आना फिलहाल ‘बेहद असंभव’ है, लेकिन वह ‘किंग’ न सही, ‘किंगमेकर’ की भूमिका में जरूर नजर आ सकते हैं.
अब सबकी निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब वोटों की गिनती होगी और EVM में कैद फैसला सबके सामने आएगा. तब यह साफ हो पाएगा कि तमिलनाडु के ‘थलपति’ का राजनीतिक भविष्य कैसा होगा. क्या वह सत्ता की कुर्सी हासिल करने वाले अगले सुपरस्टार होंगे या एक मजबूत विपक्ष की भूमिका में रहेंगे. यह तय है कि जिस तरह का जोश उनके युवा समर्थकों में दिखता है, वह तमिलनाडु की राजनीति की दिशा बदलने की क्षमता जरूर रखता है.



