Justice Swarana Kanta Sharma Profile: आजकल देश के कानूनी और सियासी गलियारों में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है- जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और CBI के बीच चल रही कानूनी जंग की सुनवाई यही जज कर रही हैं।
केजरीवाल की तरफ से न सिर्फ केस की सुनवाई पर सवाल उठाए गए, बल्कि जज को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए गए। इसके बाद अचानक से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा चर्चा के केंद्र में आ गईं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर वो कौन हैं, उनका करियर कैसा रहा और हाई कोर्ट जज बनने तक का सफर कैसा रहा। साथ ही जानेंगे कि एक हाई कोर्ट जज को कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं।
▶️ कौन हैं दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा? (Who is Justice Swarana Kanta Sharma)जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में जज हैं। 28 मार्च 2022 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। जस्टिस शर्मा का अनुभव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने यूके, अमेरिका, सिंगापुर और कनाडा जैसे देशों में जाकर पढ़ाई और रिसर्च की है। ये एक ऑथर भी हैं, इन्होंने अब तक 5 किताबें लिखी हैं।
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▶️ जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा शिक्षा (Justice Swarana Kanta Sharma Educational Journey)जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का शैक्षणिक रिकॉर्ड किसी मिसाल से कम नहीं है। उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर दौलत राम कॉलेज से हुई, जहां उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर (B.A. Hons.) में ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दिनों में वह इतनी होनहार थीं कि उन्हें साल की ‘सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर छात्रा’ के खिताब से नवाजा गया था। लेकिन साहित्य के प्रति उनके लगाव ने उन्हें कानून की पढ़ाई से दूर नहीं रखा।
साल 1991 में उन्होंने अपनी एलएलबी (LL.B.) पूरी की और 2004 में एलएलएम (LL.M.) की डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का सिलसिला यहीं नहीं रुका। साल 2025 में, चार साल के कड़े शोध के बाद उन्हें Ph.D. की उपाधि मिली।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की थीसिस का विषय न्यायिक शिक्षा (Judicial Education) पर आधारित था, जिसके लिए उन्होंने यूके, यूएसए, सिंगापुर और कनाडा जैसे देशों की न्याय प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसके अलावा उनके पास मार्केटिंग मैनेजमेंट और एडवरटाइजिंग में भी डिप्लोमा है।
▶️24 की उम्र में मजिस्ट्रेट और 35 में सेशंस जज (Justice Swarana Kanta Sharma Professional Growth)जस्टिस शर्मा के करियर की सबसे बड़ी खासियत उनकी कम उम्र में मिली सफलताएं हैं। वह महज 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट बन गई थीं। उनकी कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वह 35 साल की हुईं, उसी दिन उन्हें सेशंस जज के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।
तीन दशकों से ज्यादा के अपने करियर में उन्होंने दिल्ली की लगभग हर बड़ी अदालत में काम किया है। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं:
स्पेशल जज (CBI)
: भ्रष्टाचार से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई की।
प्रिंसिपल जज (फैमिली कोर्ट):
पारिवारिक विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
महिला अदालत (Mahila Court): महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख अपनाया।
POCSO कोर्ट:बच्चों और महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की अध्यक्षता की।
मार्च 2022
में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के पद पर तैनात थीं।
▶️ सिर्फ जज ही नहीं, 5 किताब भी लिख चुकी हैं (Justice Swarana Kanta Sharma Author)
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पहचान सिर्फ कानून की बारीकियों तक सीमित नहीं है। वह एक शानदार लेखिका भी हैं और उन्होंने अब तक 5 किताबें लिखी हैं। उनकी किताबें समाज के उन वर्गों को समर्पित हैं जो अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं:
‘Don’t Break After Break-Up’:
यह किताब उन महिलाओं के लिए एक गाइड की तरह है जो ब्रेकअप के दर्द से गुजर रही हैं।
‘Beyond Baghban’:
इसमें बुजुर्गों के भावनात्मक और वित्तीय संघर्षों को दर्शाया गया है।
‘Tumhari Sakhi’:
महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए लिखी गई किताब।
‘Love Full Circle’:
यह उनकी कल्पनाशीलता को दर्शाने वाला एक उपन्यास (Fiction) है।
‘Judicial Education’:
यह किताब न्यायिक प्रणाली को बेहतर बनाने के विजन पर आधारित है।<
▶️ हाई कोर्ट के जज को कितनी मिलती है सैलरी? (Delhi High Court Judge Salary and Perks in 2026)जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के प्रोफाइल के साथ-साथ लोग यह भी जानना चाहते हैं कि हाई कोर्ट जज का ओहदा और सुविधाएं कैसी होती हैं। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज की सैलरी और भत्ते काफी शानदार होते हैं:
मूल वेतन (Basic Salary):
एक हाई कोर्ट जज को हर महीने ₹2,25,000 का फिक्स्ड बेसिक वेतन मिलता है। वहीं मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की सैलरी ₹2,50,000 होती है।<
भत्ते (Allowances):
इसमें महंगाई भत्ता (DA) और सत्कार भत्ता (Sumptuary Allowance) शामिल होता है। जज को ₹27,000 और मुख्य न्यायाधीश को ₹34,000 प्रति माह सत्कार भत्ता मिलता है।
कुल आय (Gross Income):
अगर सभी भत्तों और सुविधाओं को जोड़ दिया जाए, तो एक जज की कुल मासिक वैल्यू ₹3.5 लाख से ₹5.5 लाख के बीच बैठती है।
अन्य सरकारी सुविधाएं: रहने के लिए शानदार निशुल्क सरकारी आवास।
सुरक्षाकर्मी और घर के लिए स्टाफ।
ड्राइवर के साथ सरकारी गाड़ी और हर महीने 200 लीटर पेट्रोल।
बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं और ऑफिस भत्ता।
▶️ अरविंद केजरीवाल केस में क्यों आईं चर्चा में? (Why in News: Kejriwal Case)अरविंद केजरीवाल के मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का नाम तब उछला जब सीबीआई ने मुख्यमंत्री की रिहाई को चुनौती दी। केजरीवाल ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि जस्टिस शर्मा खुद को इस केस से अलग (Recuse) कर लें। केजरीवाल का पक्ष था कि उन्हें इस बेंच से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है और उन्होंने जज पर कुछ गंभीर आरोप भी लगाए।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जज का रिकॉर्ड और उनका लंबा अनुभव उनकी निष्पक्षता का प्रमाण होता है। जस्टिस शर्मा एक प्रशिक्षित ‘जुडिशियल मीडिएटर’ भी हैं, जिन्होंने मध्यस्थता के जरिए सैकड़ों जटिल मामलों को सुलझाया है।
▶️ जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा हाई कोर्ट की जज कब बनीं?
उन्हें 28 मार्च 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।
2. क्या वह पहले भी केजरीवाल से जुड़े मामलों की सुनवाई कर चुकी हैं?
हाँ, उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कई अन्य याचिकाओं और जमानत अर्जियों पर भी सुनवाई की है।
3. एक हाई कोर्ट जज के पद की गरिमा क्या है?
हाई कोर्ट जज का पद संवैधानिक होता है। उन्हें केवल संसद में महाभियोग (Impeachment) के जरिए ही हटाया जा सकता है, जो उनके स्वतंत्र कार्य करने की शक्ति को दर्शाता है।
4.जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा क्या वह लेखक भी हैं?
हां, उन्होंने 5 किताबें लिखी हैं, जिनमें सामाजिक और कानूनी विषय शामिल हैं।
- जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की सैलरी कितनी है?
करीब ₹2.25 लाख बेसिक सैलरी है, कुल पैकेज ₹3.5-₹5.5 लाख तक हो सकता है।



