Priyanka Chaturvedi On Pakistan Mediation:
मध्य पूर्व में हाल ही में घोषित युद्धविराम के बाद भी तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल द्वारा लेबनान पर की गई भीषण बमबारी और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के फैसले ने इस तथाकथित शांति समझौते की पोल खोल दी है।
इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसे लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम कराने में पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में पेश किया था।
हालांकि, ताजा घटनाओं ने इस दावे को कमजोर कर दिया है। इजरायल के हमले और ईरान की जवाबी रणनीति यह दर्शाती है कि जमीनी हकीकत में किसी भी तरह का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है। इसी कड़ी में शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान की चुटकी ली है। साथ ही भारत की कूटनीति की तारीफ की है।
प्रियंका चतुर्वेदी का तीखा हमला
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे मामले में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की क्षमता उतनी ही है जितनी कि उसके यहां आतंकी शिविरों को खत्म करने की। उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी कटाक्ष करते हुए उसकी कूटनीतिक क्षमता को “जीरो” बताया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
भारत की कूटनीति पर उठे सवालों का जवाब
प्रियंका चतुर्वेदी ने उन आलोचकों को भी जवाब दिया जो इस संघर्ष में भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह युद्ध भारत का नहीं था, इसलिए इसमें सक्रिय भूमिका की अपेक्षा करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने एस जयशंकर के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें पाकिस्तान को ‘दलाल’ की संज्ञा दी गई थी। उनके अनुसार, भारत ने संतुलित और जिम्मेदार कूटनीति का परिचय दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट और बढ़ता वैश्विक तनाव
होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है उसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है। ईरान के इस कदम से ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी चेतावनी दी है कि यदि लेबनान को युद्धविराम में शामिल नहीं किया गया, तो समझौता टूट सकता है। इससे यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में शांति अभी दूर की कौड़ी है और हालात कभी भी और बिगड़ सकते हैं।



