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नई स्क्रैप नीति पर ट्रांसपोर्ट संगठनों की सहमति, कर्ज़ और तनाव से मुक्ति के लिए सरकार से खास अपील…

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केंद्र सरकार की पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को हटाकर बीएस-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रस्तावित प्रोत्साहन योजना को ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सकारात्मक पहल बताया.

इसके साथ ही जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील समाधान की मांग की है.

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि केंद्र सरकार की यह योजना पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता में सुधार और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. संगठन इस पहल का स्वागत करता है और स्वच्छ परिवहन के लक्ष्य में सरकार के साथ खड़ा है.

‘अर्थव्यवस्था की रीढ़ ट्रांसपोर्ट उद्योग’

राजेंद्र कपूर ने कहा कि ट्रांसपोर्ट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. माल परिवहन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, उद्योग और व्यापार सीधे तौर पर ट्रक और बस ऑपरेटरों पर निर्भर हैं. ऐसे में किसी भी नई नीति को लागू करते समय ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की आर्थिक स्थिति और वर्षों के संघर्ष को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

कठिन हालात में खरीदे गए पुराने वाहन

संघ ने बताया कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे ट्रक ऑपरेटर हैं जिन्होंने बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के वाहन बेहद कठिन परिस्थितियों में खरीदे. तीव्र प्रतिस्पर्धा, बाजार की अस्थिरता, भाड़ों में गिरावट, डीज़ल की बढ़ती कीमतें और विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार के कारण अधिकांश ट्रांसपोर्टर वर्षों तक नुकसान या बेहद कम मार्जिन पर काम करते रहे.

कर्ज़, तनाव और सामाजिक असर की आशंका

कई ट्रक ऑपरेटरों ने भारी मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक दबाव के बीच बैंकों की किश्तें किसी तरह पूरी की हैं. अब जब उनकी किश्तें समाप्त हुई हैं और स्थिर आय की उम्मीद बनी है, ऐसे समय में बिना वैकल्पिक समाधान के वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया तो बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर फिर से कर्ज़ के दलदल में फंस सकते हैं. इससे मानसिक अवसाद, पारिवारिक विघटन और गंभीर सामाजिक समस्याएं पैदा होने की आशंका है.

रेट्रोफिटमेंट जैसे विकल्पों पर विचार की मांग

एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह अपने तकनीकी संसाधनों और अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से यह अध्ययन करे कि पुराने बीएस-1, 2, 3 और 4 श्रेणी के वाहनों को पूरी तरह सड़क से हटाने के बजाय सरकारी सहायता से उनके इंजन में तकनीकी सुधार, रेट्रोफिटमेंट या इंजन परिवर्तन कर नियंत्रित प्रदूषण स्तर के साथ चलने की अनुमति दी जा सकती है. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लाखों ट्रांसपोर्ट परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी.

ट्रांसपोर्ट संगठन ने मांग की है कि नए वाहन खरीदने के लिए पर्याप्त ब्याज सब्सिडी दी जाए. पुराने वाहन स्क्रैप करने के बाद खरीदे गए नए वाहनों पर जीएसटी में राहत प्रदान की जाए. स्क्रैप मूल्य को सम्मानजनक बनाया जाए. यह योजना छोटे, मध्यम और एकल ट्रक ऑपरेटरों पर भी समान रूप से लागू हो. किसी भी कठोर निर्णय से पहले ट्रांसपोर्ट संगठनों से संवाद और परामर्श किया जाए.

राजेंद्र कपूर ने दोहराया कि ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पर्यावरण संरक्षण के विरोधी नहीं हैं. वे सरकार के साथ मिलकर स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं. इसके लिए आवश्यक है कि नीतियां दंडात्मक नहीं बल्कि सहयोगात्मक, संवेदनशील और व्यावहारिक हों. एसोसिएशन ने भरोसा जताया है कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लेगी. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश के लाखों ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और उनके परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित रह सकेगा.